मकर संक्रांति पर करीब 21 लाख लोगों ने संगम में डुबकी लगाई

राष्ट्रीय जजमेंट

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी के पावन संगम में स्नान के साथ माघ मेला सोमवार से शुरू हो गया और करीब 21 लाख लोगों ने स्नान किया। मेलाधिकारी दयानंद प्रसाद के मुताबिक, सोमवार शाम छह बजे तक लगभग 20 लाख 90 हजार श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। उन्होंने बताया कि रविवार की रात से ही श्रद्धालुओं का मेला क्षेत्र में आना जारी रहा जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। पूरे मेला क्षेत्र में जगह जगह लोगों ने स्नानार्थियों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरण किया गया। तीर्थ पुरोहित आचार्य राजेंद्र मिश्र ने बताया कि मकर संक्रांति में स्नान का मुहूर्त कल रात्रि दो बजकर 42 मिनट पर सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ शुरू हुआ और यह आज सूर्यास्त तक रहा।

उन्होंने बताया कि चूंकि माघ मेला सर्दी के मौसम का मेला है, इसलिए कड़ाके की ठंड पड़ने के बावजूद स्नानार्थियों के उत्साह में कोई कमी नहीं रही और लोग आज तड़के से ही स्नान कर पुण्य के भागी बने। मिश्र ने बताया, “मान्यता है कि प्रयागराज के माघ मेले में मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के लिए सभी 33 कोटि देवी-देवता भी अदृश्य रूप में यहां आते हैं। इसलिएदेश के कोने कोने से लोग गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती की पावन धारा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।” जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि स्नान के दौरान किसी तरह की अनहोनी से बचने के लिए 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ वाराणसी की दो टीमें घाटों पर तैनात की गई हैं।

 

 

मेलाधिकारी प्रसाद ने बताया कि मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस आयुक्त रमित शर्मा, कुम्भ मेलाधिकारी विजय किरण आनंद, डीआईजी (माघ मेला) डॉ. राजीव नारायण मिश्र और जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल निरंतर भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। उन्होंने बताया कि माघ मेले को 786 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आयोजित किया गया है और पांच सेक्टरों में बांटा गया है। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आठ प्रमुख घाट बनाए गए हैं जिनकी लंबाई लगभग 3300 फुट है और आगे स्नान पर्वों पर इन घाटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया, “ इसके अलावा, नदी पार करने की सुविधा के लिए छह पांटून पुल बनाए गए हैं और 3.5 किलोमीटर ‘डीप वाटर बैरीकेडिंग’ की गई है।

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