निवेश के नाम पर लाखों की ठगी का भंडाफोड़, 11 आरोपी गिरफ्तार, 92 सिम और 40 मोबाइल बरामद, कंबोडिया से जुड़े तार

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय निवेश धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 11 शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली और मुंबई के बीच बैठकर कंबोडियाई ठगों के लिए ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ का जाल बुन रहे थे। पुलिस ने इनके पास से 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक/चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, 2 पीओएस मशीनें, 6 यूपीआई स्कैनर और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तजिंद्र सिंह उर्फ लकी (26), आशीष सैनी (24), शिव दयाल सिंह (28), शिवा (18), गिरिराज किशोर (18), प्रतिभा उर्फ पायल (25), सतीश (34), रामदेव सांगला (50), प्रवीण कुमावत उर्फ लकी (20), दीपक मेवाड़ा उर्फ देव (35) और त्रिलोक चंद नायक (32) के रूप में हुई है। इस गिरोह ने एक वरिष्ठ नागरिक ए. श्रीनिवासन से ‘हाई रिटर्न’ का झांसा देकर ₹22.67 लाख की ठगी की थी।

दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई 60 वर्षीय ए. श्रीनिवासन की शिकायत पर शुरू हुई, जिनसे निवेश के नाम पर ₹22.67 लाख की ठगी की गई थी। ठगों ने फेसबुक पर एक विज्ञापन चलाया था जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रेडिंग का झांसा दिया गया था। इस विज्ञापन में वित्त मंत्री के भाषण का दुरुपयोग कर लोगों को गुमराह किया जा रहा था। पीड़ित को ‘मुद्रावन’ ऐप पर रजिस्टर करवाकर भारी मुनाफे का लालच दिया गया और उनसे विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए गए, जिसके बाद आरोपियों ने संपर्क तोड़ दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशंस संघमित्रा और थाना प्रभारी प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एसआई लव देशवाल और उनकी टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। मनी ट्रेल और डिजिटल फुटप्रिंट्स के विश्लेषण से पता चला कि यह सिंडिकेट दिल्ली के रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस से चल रहा है। पुलिस ने इन ठिकानों पर छापेमारी कर तजिंद्र सिंह सहित 5 आरोपियों को दबोचा, जो फर्जी कंपनियां बनाकर बैंक खाते खोलने का ऑफिस चला रहे थे। इनके पास से ‘क्रेओविया टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ की फर्जी स्टैम्प्स भी बरामद हुईं, जिसका इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया था।

जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि ठगी की रकम मुंबई के गोरेगांव स्थित एक्सिस बैंक के खातों में भी भेजी गई थी। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने राजस्थान के विजयनगर और ब्यावर में छापेमारी की, जहां से रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत और अन्य को गिरफ्तार किया गया। ये आरोपी राजस्थान से मुंबई शिफ्ट होकर कंबोडिया स्थित मुख्य सरगनाओं को बैंक खाते और सिम कार्ड सप्लाई करते थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये खाते पहले छोटे ट्रांजेक्शन से ‘टेस्ट’ किए जाते थे और फिर बड़ी ठगी की रकम मंगाने के लिए इस्तेमाल होते थे।

पकड़े गए आरोपियों में 18 साल के युवाओं से लेकर 50 साल तक के व्यक्ति शामिल हैं। आरोपी तजिंद्र सिंह रोहिणी से फ्रंट ऑफिस संभालता था, जबकि अन्य सदस्य फर्जी सिम कार्ड और एटीएम कार्ड का इंतजाम करते थे। पुलिस ने इस गिरोह के कब्जे से एक लैपटॉप, डेस्कटॉप और प्रिंटर भी जब्त किया है जिसका उपयोग फर्जी दस्तावेज बनाने में होता था। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के मुख्य सरगना “PK” और कंबोडिया में बैठे अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर लुभावने निवेश विज्ञापनों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।

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