कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन और तेज होने की संभावना

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कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले दो दिन में बेहद तेज हो गया है। किसान दिल्‍ली आने पर अड़े हुए थे जिसकी वजह से हरियाणा और दिल्‍ली के सीमावर्ती इलाकों में माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा।

नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर जारी किसानों का आंदोलन शनिवार को और उग्र हो गया। दिल्ली-हरियाणा सीमा पर हजारों प्रदर्शनकारी जमा हुए थे। पुलिस ने आगे बढ़ने नहीं दिया। नहीं मानें तो आंसू गैस के गोले दागे गए। आंदोलनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें भी की गई। किसानों ने भी अपने रास्ते की अड़चन को दूर करने में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी।

उन्होंने नाकाबंदी को हटाने के लिए एक ट्रक का इस्तेमाल कर एक पुलिस वाहन को टक्कर मार दी। दिल्ली पुलिस ने तब लाठीचार्ज का सहारा लिया। पहले दिल्‍ली पुलिस किसानों को स्‍टेडियमों में अस्‍थायी जेल बनाकर रखना चाहती थी लेकिन दिल्‍ली सरकार के मंजूरी न देने पर उन्‍हें बुराड़ी मैदान में धरने की इजाजत दे दी गई है।

इसी दौरान राजनीति भी जो पकड़ रही है देश दो हिस्सों में बट गया एक धड़ा बिल के समर्थन में है एक धड़ा बिल के विरोध में है यहीं दूसरी ओर मैन मीडिया इस आंदोलन को अनदेखा कर रही है कुछ राजनीतिक समर्थक तो इसे पाकिस्तान और मुस्लिमों से भी जोड़ने लगे है भारत की हालत आज यह है कि आप कोई अपने हक लिए खड़ा होता है

तो सत्ता धारी सरकारे आपको आतंकवादी, देशद्रोही, कम्युनिस्ट आदि उपाधियों से सम्मानित करती है जो एक राज्य से बाहर नहीं गया उसका संबंध पाकिस्तान या चीन से बता दिया जाता हैहाल ही की जानकारी के मुताबिक सभी आंदोलनकारी आंदोलन बाली जगह पर ही अपने डेरा डाले हुए है

धर्मेन्द्र कुमार कुशवाहा (झाँसी सम्वाददाता)

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