भगोड़ों के लिए दिल्ली में कोई जगह नहीं: डीसीपी आकांक्षा यादव के नेतृत्व में 13 अपराधी गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने अदालतों द्वारा ‘घोषित अपराधी’ करार दिए गए बदमाशों के विरुद्ध एक विशेष अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है। जिले की विभिन्न टीमों और स्पेशल स्टाफ ने मिलकर कुल 13 ऐसे अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से अपनी गिरफ्तारी से बच रहे थे। पकड़े गए आरोपियों में बलात्कार, पॉक्सो एक्ट, एनडीपीएस और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त अपराधी शामिल हैं।

उत्तर-पश्चिम जिले की डीसीपी आकांक्षा यादव ने बताया कि कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और लंबित मामलों को सुलझाने के लिए जिले की ‘पीओ टीमों’ को सक्रिय किया गया था। इस अभियान के तहत स्पेशल स्टाफ, थाना मुखर्जी नगर, सुभाष प्लेस और महिंद्रा पार्क की टीमों ने सराहनीय कार्य किया है।

स्पेशल स्टाफ की टीम ने कुल 5 घोषित अपराधियों को दबोचा। इनमें 28 वर्षीय रजत शामिल है, जो साल 2018 में थाना चावला में दर्ज बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के मामले में वांछित था और 2018 से ही फरार चल रहा था। इसके अलावा टीम ने शंकर (चेक बाउंस मामला), परवेज खान (एनआई एक्ट), नितिन उर्फ राहुल (चोरी) और रामप्रीत (एनआई एक्ट) को भी गिरफ्तार किया है।

थाना मुखर्जी नगर की टीम ने मनीष (32) को ट्रेस किया, जिसे एनडीपीएस एक्ट के मामले में हाल ही में घोषित अपराधी ठहराया गया था। वहीं, थाना सुभाष प्लेस की टीम (जहांगीर पुरी स्टाफ की सहायता से) ने तीन भगोड़ों—उमेश (झपटमारी), मनीष सेठी (धोखाधड़ी) और राकेश (दहेज उत्पीड़न)—को गिरफ्तार करने में सफलता पाई।

थाना महिंद्रा पार्क की टीम ने भी चार शातिर भगोड़ों को पकड़ा है। इनमें राजन उर्फ राहुल (43) शामिल है, जो साल 2005 के आर्म्स एक्ट मामले में 2017 से फरार था। इसके अलावा टीम ने मोहम्मद हनीफ (चोरी), मंगल (झपटमारी) और अर्जुन उर्फ गोपू (झपटमारी) को भी दबोच लिया है, जो द्वारका और साकेत जैसे विभिन्न अदालतों से भगोड़े घोषित थे।

पुलिस के अनुसार, ये अपराधी अपनी पहचान छिपाकर दिल्ली और आसपास के इलाकों में रह रहे थे ताकि पुलिस की पकड़ से दूर रह सकें। डीसीपी उत्तर-पश्चिम ने बताया कि पकड़े गए सभी अपराधियों के विरुद्ध संबंधित थानों और अदालतों को सूचित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से न केवल पुराने मामलों में न्याय की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि अन्य अपराधियों के बीच भी यह कड़ा संदेश जाएगा कि वे कानून की नजरों से ज्यादा दिनों तक बच नहीं सकते।

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