टेंपो ड्राइवर से लेकर सब्जी विक्रेता तक बने पुलिसकर्मी; बिहार-झारखंड के सुदूर इलाकों से दबोचे तीन ईनामी भगोड़े

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने एक असाधारण ऑपरेशन को अंजाम देते हुए तीन ऐसे खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार किया है जो पिछले कई दशकों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे। महज चार सदस्यों की एक छोटी सी टीम ने सिर्फ 6 दिनों के भीतर दिल्ली से बिहार और झारखंड तक 3300 किलोमीटर का सफर तय किया और तीन अलग-अलग जघन्य मामलों में वांछित ‘घोषित अपराधियों’ को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। पकड़े गए आरोपियों में से दो पर 20,000-20,000 रुपये और एक पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित था।

डीसीपी क्राइम संजीव कुमार यादव ने बताया कि एसीपी सतेंद्र मोहन के पर्यवेक्षण और इंस्पेक्टर महिपाल सिंह के नेतृत्व वाली टीम को पुराने और अनसुलझे मामलों के भगोड़ों को पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया था। इस टीम में एसआई रितेश, जय, विकास और हेड कांस्टेबल बिजेंद्र शामिल थे। टीम ने इन अपराधियों तक पहुँचने के लिए अपनी पहचान छिपाई और टेंपो ड्राइवर से लेकर सब्जी विक्रेता तक का वेश धारण किया।

पहला मामला साल 2014 का है, जहाँ राजौरी गार्डन इलाके में एक नाबालिग से यौन शोषण के आरोपी युधिष्ठिर (34) पर 10,000 का इनाम था। वह 12 साल से फरार था। टीम जब झारखंड के दुमका पहुँची, तो पता चला कि वह अब टेंपो चलाता है। टीम ने अपनी पहचान छिपाकर एक टेंपो किराए पर लिया और यात्री व ड्राइवर बनकर उसके रूट को ट्रैक किया। 2 मई को टीम ने उसे रंगे हाथों पहचान कर दबोच लिया।

दूसरा आरोपी मोहम्मद अखलाक उर्फ अमित (28) साल 2014 में रनहोला इलाके में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में वांछित था और उस पर 20,000 का इनाम था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए केरल भाग गया था। जब पुलिस को सूचना मिली कि वह अपनी मां की बीमारी के कारण बिहार के पूर्णिया स्थित गांव आया है, तो पुलिस ने वहां छापा मारा। पुलिस को देखते ही वह छत से कूदकर भागने लगा, लेकिन टीम ने करीब 3 किलोमीटर तक पैदल पीछा कर उसे पकड़ लिया।

तीसरा मामला सबसे पुराना है। साल 2005 में उत्तम नगर इलाके में हत्या के प्रयास के आरोपी राम कुमार (41) पर 20,000 का इनाम था। वह पिछले 21 सालों से अपना ठिकाना बदल-बदल कर बिहार में सब्जी बेच रहा था। टीम जब भोजपुर के आरा पहुँची, तो वहां पुलिसकर्मियों ने खुद सब्जी विक्रेता बनकर जाल बिछाया। 4 मई को जैसे ही राम कुमार की पहचान हुई, उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल बताता है कि वे अपनी पहचान छिपाने के लिए बेहद साधारण जीवन जी रहे थे ताकि किसी को शक न हो। डीसीपी संजीव यादव के अनुसार, यह ऑपरेशन दिल्ली पुलिस के उस संकल्प को दोहराता है कि अपराधी चाहे कितने भी सालों तक और कितनी भी दूर क्यों न भाग जाए, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुँच कर ही दम लेंगे। पुलिस टीम इन सभी को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लेकर आई है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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