VAHAN पोर्टल में सेंध लगाकर चोरी की गाड़ियों को वैध बनाने वाले बड़े रैकेट का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड सहित 10 गिरफ्तार, 31 लग्जरी कारें बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (इंटर स्टेट सेल) ने एक अत्यंत संगठित और पेशेवर अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो लग्जरी गाड़ियाँ चुराने, उनके चेसिस नंबर बदलने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन्हें दोबारा पंजीकृत कर बेचने के काले कारोबार में लिप्त था। पुलिस ने इस बड़े ऑपरेशन के तहत गिरोह के मुख्य सरगना दमनदीप सिंह उर्फ लकी (42) सहित कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में बी.टेक स्नातक अरविंद शर्मा, आरएलए बिलासपुर का क्लर्क सुभाष चंद, चेसिस पंचिंग एक्सपर्ट प्रदीप सिंह उर्फ हीरा, और नार्को सिंडिकेट से जुड़ा तिफले नौखेज प्रमुख हैं। पुलिस ने इनके पास से कुल 31 हाई-एंड लग्जरी वाहन बरामद किए हैं, जिनमें 11 फॉर्च्यूनर, 6 क्रेटा, 6 सेल्टोस, और महिंद्रा थार जैसी गाड़ियाँ शामिल हैं। साथ ही, चेसिस नंबरों को बदलने में इस्तेमाल होने वाले मैकेनिकल उपकरण भी बरामद किए गए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट अब तक 1000 से अधिक चोरी की गाड़ियों को फर्जी तरीके से बेचकर सरकारी राजस्व और आम जनता को करोड़ों का चूना लगा चुका है।

अपराध शाखा के डीसीपी आदित्य गौतम ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस जांच की शुरुआत बीते वर्ष 5 अगस्त को पीतमपुरा निवासी एक महिला की हुंडई क्रेटा चोरी होने की ई-एफआईआर से हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को इंटर स्टेट सेल, चाणक्यपुरी को स्थानांतरित किया गया। एसीपी रमेश चंद्र के पर्यवेक्षण और इंस्पेक्टर मनमीत मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एसआई राजेंद्र ढाका, एएसआई सुरेंद्र सिंह, एएसआई प्रवीण सिंह, एचसी मोनित और सुनील ढाका शामिल थे। इस टीम ने दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में सघन छापेमारी कर इस पूरे नेटवर्क के जाल को ध्वस्त किया।

जांच के दौरान गिरोह के काम करने के बेहद शातिर और तकनीकी तरीके का पता चला। यह सिंडिकेट ऑटो-लिफ्टर्स और मनबीर सिंह उर्फ मिंटा जैसे संपर्कों के जरिए चोरी की या बैंक लोन डिफॉल्ट वाली गाड़ियाँ प्राप्त करता था। इसके बाद, प्रदीप सिंह जैसा तकनीकी एक्सपर्ट फरीदाबाद स्थित अपनी वर्कशॉप में इन गाड़ियों के असली चेसिस नंबर मिटाकर उन पर दूसरे राज्यों के टोटल लॉस वाहनों की पहचान पंच कर देता था। इस दौरान, अरविंद शर्मा जैसे एजेंट फर्जी सेल लेटर, जाली पंजीकरण कागजात और फर्जी बैंक एनओसी तैयार करते थे। सबसे गंभीर बात यह रही कि हिमाचल प्रदेश के आरएलए बिलासपुर में तैनात क्लर्क सुभाष चंद और सरकारी कर्मचारी गौरव भारद्वाज ओटीपी हेरफेर के जरिए वाहन पोर्टल का अवैध इस्तेमाल कर इन चोरी की गाड़ियों को सरकारी रिकॉर्ड में वैध पंजीकृत कर देते थे।

गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल उनकी विशेषज्ञता को दर्शाता है। मुख्य मास्टरमाइंड दमनदीप सिंह जालंधर में सेकंड-हैंड कार का शोरूम चलाता था और वहीं से पूरे गिरोह के वित्त और लॉजिस्टिक्स को नियंत्रित करता था। आरोपी अरविंद शर्मा एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम कर चुका बी.टेक ग्रेजुएट है, जो पिछले कई वर्षों से फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम कर रहा था। वहीं, तिफले नौखेज इस सिंडिकेट से मिली गाड़ियों का उपयोग मादक पदार्थों की तस्करी के लिए करता था। इनके अलावा, गिरोह में अमनदीप, हेमराज सिंह उर्फ हेमा, कंवलजीत उर्फ जॉली और बृज मोहन कपूर उर्फ बॉबी रिसीवर और मिडलमैन के रूप में सक्रिय थे, जो इन गाड़ियों को अनजान ग्राहकों को बेचते थे। पुलिस ने बताया कि गिरोह इतना संगठित था कि चोरी, पंजीकरण और बिक्री का काम अलग-अलग राज्यों में किया जाता था ताकि सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दिया जा सके। फिलहाल पुलिस अन्य फरार सदस्यों की गिरफ्तारी और अधिक वाहनों की बरामदगी के लिए जुटी हुई है।

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