दिल्ली में “सशक्त महिलाएं, विकसित भारत” के संकल्प के साथ सप्त शक्ति नारी सम्मेलन का भव्य आयोजन

नई दिल्ली: विद्या भारती उच्चशिक्षा संस्थान (दिल्ली प्रांत) द्वारा भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के सभागार में “सशक्त महिलाएं, विकसित भारत के लिए” विषय पर केंद्रित एक दिवसीय ‘सप्त शक्ति नारी सम्मेलन’ का सफल आयोजन किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति-निर्धारकों और सामाजिक चिंतकों ने शिरकत की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एक समावेशी और सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ भारत के निर्माण में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका और उनके नेतृत्व को रेखांकित करना था। यह सम्मेलन विशेष रूप से ‘सप्तशक्ति’ की प्राचीन अवधारणा पर आधारित था, जो स्त्रीत्व के सात गुणों—श्री, वाक्, कीर्ति, स्मृति, मेधा, क्षमा और धृति को राष्ट्र निर्माण का आधार मानता है।

सम्मेलन की मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहाटकर ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं न केवल आर्थिक विकास की वाहक हैं, बल्कि वे हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक भी हैं। उन्होंने आधुनिक समाज में बढ़ते व्यक्तिवाद और कमजोर होती परिवार संस्था जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए “तेरे मेरे सपने” जैसे कार्यक्रमों की महत्ता बताई, जो पारिवारिक संबंधों को मजबूती प्रदान करते हैं। वहीं, विशिष्ट अतिथि इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजिलाल ने कार्यबल में महिलाओं की मात्र 34 प्रतिशत भागीदारी पर ध्यान आकर्षित किया और इसे शिक्षा, डिजिटल शक्ति और उद्यमिता के माध्यम से बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में दून विश्वविद्यालय की कुलपति और मुख्य वक्ता प्रो. सुरेखा डंगवाल ने महिला सशक्तिकरण के बहुआयामी स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने जीजाबाई, रानी लक्ष्मीबाई और सावित्रीबाई फुले जैसी महान विभूतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि सशक्तिकरण केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना का नाम है। विशिष्ट अतिथि प्रो. मंजूश्री सरदेशपांडे ने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की निरंतरता और ‘पंचकोश’ की अवधारणा के माध्यम से शारीरिक व आध्यात्मिक विकास के समन्वय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए **प्रो. कैलाशचंद्र शर्मा** ने ज्ञान, सेवा और नवाचार को विकसित भारत का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।

सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने विधायी संस्थाओं और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ करना समय की मांग है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिलाओं के नेतृत्व में होने वाला विकास ही भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाएगा। सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और नेतृत्व जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि महिला सशक्तिकरण अब केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय अनिवार्यता है।

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