शिवसेना और एनसीपी जैसा तो नहीं होगा आम आदमी पार्टी का हाल?, अरविंद केजरीवाल के सामने बड़ी चुनौती

नई दिल्ली। राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद अब अरविंद केजरीवाल और उनके करीबियों के सामने दिल्ली और पंजाब की सरकारों को बचाने का काम बड़ी चुनौती है। आप के सांसद के तौर पर राघव चड्ढा पंजाब का प्रभार संभालते रहे हैं। ऐसे में पंजाब में आम आदमी पार्टी के विधायकों तक उनकी नजदीकी रही है। वहीं, राघव चड्ढा पहले दिल्ली में विधायक भी रहे। ऐसे में अगर बीजेपी का दामन थामने वाले राघव चड्ढा अपना खेल आगे बढ़ाते हैं, तो अरविंद केजरीवाल के लिए मुश्किल पैदा हो सकती है।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 22 विधायक हैं। वहीं, पंजाब में आप के 92 विधायक हैं। अगर इनमें भी दो-तिहाई को राघव चड्ढा और उनके साथ बीजेपी में गए आप के राज्यसभा सांसद तोड़ लेते हैं, तो शिवसेना और एनसीपी की तरह वे भी अरविंद केजरीवाल की पार्टी पर कब्जा कर सकते हैं। ऐसे में अरविंद केजरीवाल को अपने हाथ से पार्टी न खिसकने देने के लिए हर तरह का कदम उठाना पड़ेगा। राघव चड्ढा ने जब शुक्रवार को बीजेपी ज्वॉइन करने का एलान किया, तो उनके साथ आप के सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी थे। राघव ने दावा किया है कि क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल भी उनके साथ हैं।

आम आदमी पार्टी ने बीते दिनों राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता पद से हटा दिया था। खबर ये भी आई थी कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर ये भी कहा था कि पार्टी की ओर से राघव चड्ढा को बोलने का वक्त न दिया जाए। अरविंद केजरीवाल ने इसके बाद अशोक मित्तल को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का उप नेता बनाया था। इसके बाद ईडी ने अशोक मित्तल के घर, मिठाई की दुकान और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर छापा मारा था। अशोक मित्तल भी अब राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में शामिल हो गए हैं। वहीं, अरविंद केजरीवाल की पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा है कि वो राघव चड्ढा समेत बीजेपी में गए सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए राज्यसभा महासचिव को चिट्ठी भेजेंगे।

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