कल्याणपुरी पुलिस ने महाराष्ट्र के डोंबिवली से बरामद किए दो लापता किशोर

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस के ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत पूर्वी जिले की कल्याणपुरी थाना पुलिस ने दो लापता किशोरों को हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के डोंबिवली से सकुशल बरामद कर लिया है। ये दोनों किशोर परीक्षा परिणाम के डर से अपने घर से भाग गए थे। पुलिस ने इस जटिल केस को सुलझाने के लिए तकनीक और जमीनी पड़ताल का अनूठा मेल दिखाया। 700 से अधिक सीसीटीवी कैमरों का विश्लेषण और इंस्टाग्राम के डिजिटल सुराग ने पुलिस को सफलता दिलाई।

पूर्वी जिला के डीसीपी राजीव कुमार ने मामले का विवरण देते हुए बताया कि 30 मार्च को कल्याणपुरी थाने में प्रमोद ठाकुर और भावना नामक महिला ने अपने बच्चों के लापता होने की अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर तलाशी अभियान शुरू किया गया था। जांच का जिम्मा कल्याणपुरी के एसएचओ मुकेश कुमार बालियान के नेतृत्व में एसआई मयंक इस्तवाल, हेड कांस्टेबल कुलदीप और हेड कांस्टेबल विक्रांत की टीम को सौंपा गया था।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने आनंद विहार और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आसपास लगे 200 से अधिक कैमरों सहित कुल 700 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया। फुटेज से संकेत मिला कि दोनों बच्चे आनंद विहार रेलवे स्टेशन की ओर गए थे। तकनीकी निगरानी के दौरान पुलिस को एक बच्चे की इंस्टाग्राम एक्टिविटी का सुराग मिला, जो यात्रा के दौरान अलग-अलग मोबाइल हॉटस्पॉट का इस्तेमाल कर रहा था। दिल्ली और यूपी के चिपियाना समेत कई स्थानों पर छापेमारी के बाद भी वे हाथ नहीं आए, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी।

सक्रिय निगरानी के दौरान पुलिस को एक नई इंस्टाग्राम आईडी का पता चला, जिसे किसी अन्य के मोबाइल से लॉग-इन किया गया था। तकनीकी विश्लेषण से उस मोबाइल नंबर और बच्चे की लोकेशन महाराष्ट्र के डोंबिवली में मिली। पुलिस टीम बिना समय गंवाए महाराष्ट्र रवाना हुई। वहां पहुंचने के बाद पुलिस ने लगातार 20 घंटे तक डोंबिवली और पनवेल के इलाकों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया और 50 से अधिक होटलों की जांच की। आखिरकार, पुलिस ने दोनों बच्चों को डोंबिवली के रोटरी क्लब पार्क के पास देख लिया और उन्हें सुरक्षित बरामद कर लिया।

पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे 9वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम के डर और अभिभावकों की डांट के कारण स्वेच्छा से घर से भाग गए थे। डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाना था। पुलिस की इस तत्परता ने दो परिवारों को उनका खोया हुआ सुकून वापस लौटा दिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और बच्चों की काउंसिलिंग की प्रक्रिया जारी है।

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