केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में किया “संकटग्रस्त बंगाल” पुस्तक का विमोचन, प्रशासनिक विफलता पर साधा निशाना

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान शोधपरक पुस्तक “संकटग्रस्त बंगाल” का विमोचन किया। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पश्चिम बंगाल के प्रभारी सुनील बंसल सहित कई प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक हस्तियां उपस्थित रहीं। यह पुस्तक राज्य के वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य का एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इस अकादमिक कार्य का मुख्य संपादन डॉ. दीप नारायण पांडेय के नेतृत्व में डॉ. देवेन्द्र भारद्वाज, प्रवीण गौतम और उज्ज्वल नारायण की टीम ने किया है, जिसमें जेएनयू के शोधार्थी विजय जयसवाल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

विमोचन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पुस्तक को पश्चिम बंगाल की जमीनी हकीकत का एक जीवंत दस्तावेज़ करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध-आधारित और तथ्यपरक कार्य न केवल लोकतंत्र को सशक्त बनाते हैं, बल्कि जनता के सामने कड़वी सच्चाई भी रखते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि जिस बंगाल को कभी अपनी कला, संस्कृति और बौद्धिकता के लिए ‘सोनार बंगाल’ कहा जाता था, वह आज कानून-व्यवस्था के पतन, राजनीतिक हिंसा, तुष्टिकरण और आर्थिक ठहराव जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। पुस्तक इन सभी समस्याओं का गहन ऐतिहासिक और समकालीन विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

इस पुस्तक में जेएनयू के शोधार्थी विजय जयसवाल द्वारा राज्य के प्रशासन और पुलिसिंग व्यवस्था पर लिखे गए अध्याय विशेष रूप से चर्चा का विषय बने हैं। इसमें राज्य के ढहते संस्थागत ढांचे और प्रशासनिक विसंगतियों का अत्यंत सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है। पूरी संपादकीय और लेखक टीम ने तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट किया है कि बंगाल का वर्तमान संकट केवल एक राजनीतिक समस्या नहीं, बल्कि एक गहरा प्रशासनिक और संस्थागत संकट है।

वर्तमान राजनीतिक माहौल के बीच इस पुस्तक को राज्य की राजनीति और अकादमिक जगत में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किताब राज्य की वर्तमान परिस्थितियों पर एक राष्ट्रव्यापी बहस को जन्म देगी। “संकटग्रस्त बंगाल” न केवल राज्य की विकराल समस्याओं और प्रशासनिक विफलताओं को निर्भीकता से उजागर करती है, बल्कि एक सुरक्षित और समृद्ध बंगाल के पुनर्निर्माण के लिए समाज को प्रेरित करने वाली एक वैचारिक मशाल के रूप में भी देखी जा रही है।

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