महिला आरक्षण पर बीजेपी का महामंथन, अमित शाह के घर परिसीमन बिल पर दिग्गजों की बैठक

राष्ट्रीय जजमेंट

संसद में महिला आरक्षण अधिनियम और परिसीमन विधेयक में संशोधनों पर चर्चा शुरू होने के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर एक बैठक की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन पर चर्चा के लिए बैठक में भाग लिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, भाजपा के महासचिव विनोद तावड़े, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, भाजपा सांसद अरुण सिंह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा बैठक में मौजूद हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सूचना एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी बैठक में शामिल हुए।

आज सुबह शुक्रवार को सुबह 10 बजे संसद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने सदन में अपनी रणनीति बनाने के लिए बैठक की। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेता काकोली घोष, मणिक्कम टैगोर, केसी वेणुगोपाल और पी चिदंबरम सदन में इंडिया ब्लॉक के सभी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित कर रहे हैं। कार्यसूची के अनुसार, लोकसभा में संवैधानिक संशोधन और परिसीमन विधेयक, 2026 को पारित करने के लिए मतदान होना है। कांग्रेस ने लोकसभा में अपने सांसदों को 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले विशेष सत्र में उपस्थित रहने और पार्टी के रुख का समर्थन करने के लिए तीन-पंक्ति का व्हिप जारी किया है।

लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी है, जो संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है, साथ ही केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर भी चर्चा हो रही है, जो इसे दिल्ली और जम्मू और कश्मीर तक विस्तारित करता है, और परिसीमन विधेयक पर भी चर्चा हो रही है, जो लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने के लिए निर्धारित है।
सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है। इसके लिए वह 2023 के अधिनियम में संशोधन और परिसीमन प्रक्रिया को 2027 की जनगणना से अलग करने हेतु संवैधानिक संशोधन ला रही है। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने परिसीमन कराने और 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने हेतु संवैधानिक संशोधन पर चिंता जताई है। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित विधेयक से सदन में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।

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