दूरदर्शन कार्यालय पर हमले की अभाविप ने की निंदा, एनएसयूआई पर लगाया गुंडागर्दी का आरोप

नई दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने दिल्ली स्थित दूरदर्शन कार्यालय पर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हमले और तोड़फोड़ की कड़े शब्दों में निंदा की है। अभाविप ने इस कृत्य को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और सरकारी संस्थानों पर इस तरह का हमला अराजकता की पराकाष्ठा है। अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एनएसयूआई की मूल प्रवृत्ति ही हिंसा रही है और वे अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। परिषद ने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि इस हिंसा में शामिल दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

मिली जानकारी के अनुसार, पूरा विवाद दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव द्वारा एक टीवी शो के दौरान वीर सावरकर पर की गई टिप्पणी का जवाब देने से शुरू हुआ। इसके विरोध में एनएसयूआई ने दूरदर्शन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन का आह्वान किया था, जो देखते ही देखते हिंसक हो गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के बाहर तोड़फोड़ की और कर्मचारियों के साथ हाथापाई भी की। अभाविप ने इसे छात्र राजनीति के गिरते स्तर का प्रतीक बताया है। परिषद का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने पिछले कुछ महीनों की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि भारत मंडपम में एआई समिट का विरोध हो या राजस्थान और दिल्ली विश्वविद्यालय में की गई तोड़फोड़, एनएसयूआई लगातार हिंसक गतिविधियों में संलिप्त रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संस्थानों के प्रति असम्मान दिखाना और पत्रकारों को डराना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। अभाविप ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वे सदैव संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखते हैं और इस तरह की अमानवीय प्रवृत्ति का पुरजोर विरोध करते रहेंगे। परिषद ने आगाह किया कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

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