दिल्ली क्राइम ब्रांच ने करोल बाग में चल रहे नकली ऑटो पार्ट्स के बड़े रैकेट का किया भंडाफोड़, 30 लाख का सामान जब्त, दो गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ER-II) ने करोल बाग इलाके में सक्रिय नकली ऑटो स्पेयर पार्ट्स बनाने और बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से ‘टीवीएस’ ब्रांड के नाम पर पैक किए गए लगभग 25 से 30 लाख रुपये के नकली पुर्जे बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भारत (27 वर्ष) और राजेंद्र सिंह (28 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से राजस्थान के बालोतरा के रहने वाले हैं। इस संबंध में क्राइम ब्रांच थाने में बीएनएस और कॉपीराइट एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

क्राइम ब्रांच के डीसीपी पंकज कुमार ने बताया कि 12 अप्रैल को करोल बाग इलाके में नकली स्पेयर पार्ट्स की बिक्री के संबंध में एक गुप्त सूचना मिली थी। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एसीपी नरेंद्र बेनीवाल के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर पवन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने करोल बाग स्थित ठिकानों पर छापेमारी की, जहाँ से टीवीएस मोटर्स कंपनी के नाम पर छपे हुए हजारों खाली पाउच, कार्टन, क्लच असेंबली, टाइमिंग चेन, ब्रेक पैड और फिल्टर बरामद हुए। पुलिस ने मौके से एक पैकिंग मशीन और बारकोड प्रिंटर भी जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल नकली सामान को असली जैसा रूप देने के लिए किया जाता था।

गिरफ्तार आरोपी भारत ने पूछताछ में बताया कि उसने कर्नाटक के हुबली से बीकॉम किया है। साल 2024 में वह दिल्ली आया और पहले जोमैटो में काम शुरू किया, लेकिन जल्द ही अधिक पैसा कमाने के लालच में वह नकली ऑटो पार्ट्स के अवैध कारोबार में शामिल हो गया। वहीं दूसरा आरोपी राजेंद्र सिंह, जो पहले मुंबई में मोबाइल एक्सेसरीज का काम करता था, वह भी कोविड के बाद दिल्ली आया और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कम मुनाफे को देखते हुए इस फर्जीवाड़े में शामिल हो गया।

पुलिस ने आरोपियों के गोदाम से लगभग 60 बोरी नकली सामान बरामद किया है, जिसमें 7400 ब्रेक शू पैकिंग, 5200 टाइमिंग चेन पाउच, सैकड़ों ऑयल सील और वी-बेल्ट शामिल हैं। ये आरोपी घटिया क्वालिटी के पुर्जों को ब्रांडेड पैकिंग में भरकर असली कीमतों पर बेचकर जनता को धोखा दे रहे थे। पुलिस के अनुसार, नकली पुर्जों का इस्तेमाल वाहनों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और इससे गंभीर दुर्घटनाएं होने का खतरा बना रहता है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के मुख्य स्रोत और अन्य वितरकों की तलाश में जुटी है ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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