साइबर ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश: मायापुरी पुलिस ने तीन मुख्य सहयोगियों को दबोचा, 1.5 करोड़ का हुआ था लेनदेन

नई दिल्ली: दिल्ली के पश्चिम जिला की मायापुरी थाना पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़े ‘म्यूल अकाउंट’ सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य सहयोगियों को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगी से होने वाली करोड़ों की कमाई को विभिन्न बैंक खातों के जरिए ठिकाने लगाने का काम करते थे। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने अब तक लगभग 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को इधर-उधर किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक (32 वर्ष), कृष्ण प्रताप सिंह (28 वर्ष) और शशि कांत (28 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन, सिम कार्ड और फर्जी फर्मों की चेक बुक व दस्तावेज बरामद किए हैं।

पश्चिम जिले के डीसीपी दराडे शरद भास्कर ने बताया कि साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान मायापुरी पुलिस को एक संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी मिली थी। तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि यह एक ‘म्यूल अकाउंट’ है, जिसका उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी के पैसों को मंगाने के लिए किया जा रहा था। एसीपी इंद्रराज सिंह मीणा और एसएचओ महिंदर लाल के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर अमित धानी के नेतृत्व वाली टीम ने बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।

पुलिस टीम ने जाल बिछाकर सबसे पहले एक आरोपी को पकड़ा, जिसने पूछताछ में अपने अन्य साथियों और म्यूल अकाउंट व्यवस्थित करने वाले नेटवर्क का खुलासा किया। उसकी निशानदेही पर दो और आरोपियों को दबोचा गया। इनके मोबाइल डेटा और चैट से पुष्टि हुई कि ये लोग एक संगठित साइबर-क्राइम सिंडिकेट का हिस्सा हैं। इनका मुख्य काम ठगी के पैसों को छिपाने के लिए लेयर्ड ट्रांजैक्शन करना था ताकि जांच एजेंसियां असली अपराधियों तक न पहुंच सकें।

आरोपियों ने पूछताछ में अपने काम करने के तरीके के बारे में बताया कि वे भोले-भाले और बेरोजगार लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों और सिम कार्ड का नियंत्रण आरोपी खुद रखते थे। ठगी की रकम आते ही उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिसके बदले इन्हें मोटा कमीशन मिलता था। पुलिस ने इनके पास से फर्जी फर्मों के नाम पर लिए गए चेक बुक और दस्तावेज भी जब्त किए हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है ताकि इस पूरे साइबर नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।

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