सागरपुर पुलिस ने मोबाइल चोरी और पुर्जे बेचने वाले गैंग का किया भंडाफोड़, 15 मोबाइल और लैपटॉप के साथ दो गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की सागरपुर थाना पुलिस ने मोबाइल चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाते हुए एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है और चोरी का सामान खरीदने वाले रिसीवर सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी के 15 मोबाइल फोन, एक आसुस लैपटॉप, एक लेनोवो टैबलेट, लैपटॉप चार्जर और मोबाइल के खुले हुए कई पुर्जे बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आयुष उर्फ निक्कू निवासी सीतापुरी और अभिषेक निवासी दुर्गा पार्क, सागरपुर के रूप में हुई है। इस गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने सागरपुर थाने में दर्ज चोरी के चार मामलों को सुलझाने में सफलता हासिल की है।

दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि इलाके में मोबाइल चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एसएचओ सागरपुर राज कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी, जिसमें हेड कांस्टेबल मंजीत, भूदेव, कांस्टेबल अरविंद, अनिल और सांवरिया शामिल थे। 10 अप्रैल को टीम ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दुर्गा पार्क और नगरवन पार्क क्षेत्र से संदिग्ध आयुष उर्फ निक्कू को पकड़ा। तलाशी लेने पर उसके पास से चोरी के दो मोबाइल बरामद हुए। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह मोबाइल चोरी कर अभिषेक नामक व्यक्ति को देता था।

पुलिस ने आयुष की निशानदेही पर अभिषेक को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 13 मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल के विभिन्न पुर्जे बरामद हुए। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि अभिषेक चोरी के फोन खरीदकर उन्हें खोल देता था ताकि उन्हें ट्रैक न किया जा सके। इसके बाद वह इन पुर्जों को खालिद नाम के व्यक्ति को बेच देता था। अभिषेक की उम्र 22 वर्ष है और वह पुराने मोबाइल फोन बेचने का काम करता था, जिसकी आड़ में वह चोरी के फोन खपाने का अवैध धंधा चला रहा था।

पुलिस की जांच में पता चला है कि यह गिरोह एक संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें मोबाइल चोरी करने से लेकर उसके पुर्जे अलग कर बाजार में बेचने तक का नेटवर्क शामिल था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य साथियों और मुख्य सरगना खालिद की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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