साइबर पुलिस ने अंतरराज्यीय ड्रग और साइबर ठगी सिंडिकेट का किया भंडाफोड़; 5 गिरफ्तार, 2.31 करोड़ की ठगी का खुलासा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के बाहरी उत्तरी जिला की साइबर पुलिस टीम ने ऑपरेशन ‘साइबर हॉक 4.0’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ उपलब्ध कराने और ठगी की रकम को क्रिप्टो करेंसी के जरिए विदेशों में बैठे हैंडलर्स तक पहुँचाने का काम करते थे।

उत्तरी रेंज के जॉइंट कमिश्नर विजय सिंह के नेतृत्व और बाहरी उत्तरी जिला डीसीपी हरेश्वर स्वामी के करीबी पर्यवेक्षण में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। एसीपी ऑपरेशन दिनेश कुमार के मार्गदर्शन और साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण और समन्वय पोर्टल से मिले डेटा के आधार पर नरेला इलाके में छापेमारी कर इन आरोपियों को दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान राहुल (22), बंटी (22), अंकित (19), सलीम उर्फ ढांचा (22) और नूरे आलम (19) के रूप में हुई है। ये सभी दिल्ली के नरेला के रहने वाले हैं।

जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट बेहद व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों के पास से 28 बैंक खाते मिले हैं, जो महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना सहित कई राज्यों की 43 शिकायतों से जुड़े हैं। इन खातों के जरिए लगभग 2.31 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। आरोपी राहुल इस सिंडिकेट का मुख्य संचालक था, जो कमीशन के बदले बैंक खाते और सिम कार्ड मुहैया कराता था। ठगी की रकम को ‘बाइनेंस’ जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिप्टो करेंसी में बदला जाता था और फिर टेलीग्राम के माध्यम से विदेशी हैंडलर्स को भेज दिया जाता था। तकनीकी जांच में एक हैंडलर का आईपी एड्रेस कंबोडिया का पाया गया है, जो इस रैकेट के अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पुष्टि करता है।

आरोपी अपने या दूसरों के दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाते थे और उनसे जुड़े सिम कार्ड हासिल करते थे। इन खातों में भारत भर के पीड़ितों से ठगी गई रकम जमा कराई जाती थी। पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए ये लोग पैसों को तुरंत क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेज देते थे। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और विदेशों में बैठे मुख्य सरगनाओं की पहचान करने में जुटी है।

इस कार्रवाई के साथ ही दिल्ली पुलिस ने जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई प्रक्रिया कानूनी नहीं है और कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या व्हाट्सएप पर गिरफ्तारी नहीं करती। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे निवेश के नाम पर मिलने वाले फर्जी प्रलोभनों में न आएं और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक विवरण या सरकारी पहचान पत्र साझा न करें। यदि कोई खतरा महसूस हो, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

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