गोविंदपुरी थाना पुलिस ने फर्जी डिग्री बनाने वाले बड़े सिंडिकेट का किया भंडाफोड़; 7 गिरफ्तार, जाली दस्तावेज और नकदी बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी जिला अंतर्गत थाना गोविंदपुरी पुलिस ने फर्जी डिग्री और प्रमाणपत्र बनाने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने रविदास मार्ग स्थित एक परिसर में छापेमारी कर 7 मुख्य जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जबकि 28 अन्य व्यक्तियों को बाउंड डाउन किया गया है। यह गिरोह “महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी” नामक फर्जी संस्थान के नाम पर देश भर के लोगों को पिछली तारीख की डिग्रियां और अंकतालिकाएं बेच रहा था।

बीती 6 अप्रैल को थाना गोविंदपुरी को एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि रविदास मार्ग स्थित एक इमारत में फर्जी डिग्री जारी करने वाला एक बड़ा रैकेट संचालित किया जा रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी जसबीर सिंह के पर्यवेक्षण और एसीपी कालकाजी वी.के.पी.एस. यादव व एसएचओ गोविंदपुरी हरनीत सिंह सूदन के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में इंस्पेक्टर विनीत मलिक, एसआई दीपक ढांडा, एसआई सृष्टि, एसआई अंकित, हवलदार सतेंद्र, हवलदार सुरजीत, सिपाही रॉबिन, सिपाही विष्णु भाटी और सिपाही निकिता शामिल थे।

पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की, जहां फर्जी डिग्रियां बनाने और पीड़ितों को कॉल करने का काम सक्रिय रूप से चल रहा था। मौके से 7 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान संजीव कुमार मौर्य, जनक नेउपाने, किशन कुमार, विक्की कुमार झा, आशीष थपलियाल, आकाश कुमार और संजय आर्य के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों जैसे संगम विहार, तुगलकाबाद और कालकाजी के निवासी हैं। पुलिस ने इस संबंध में थाना गोविंदपुरी में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।

जांच में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट बेहद शातिर और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने एक पूरी तरह से फर्जी संस्थान बना रखा था और इसके टेलीकॉलर खुद को संस्थान का आधिकारिक फैकल्टी बताकर देश भर के मासूम लोगों को झांसे में लेते थे। आरोपियों ने ‘WorkIndia’ जैसे ऐप के जरिए अपना स्टाफ भर्ती किया था और विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों का डेटा तीसरे पक्ष से प्राप्त कर उन्हें निशाना बनाया जाता था। डेटा प्रबंधन के लिए गूगल एक्सेल शीट और फर्जी ट्रांसक्रिप्ट भेजने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस ने मौके से 2,79,000 रुपये नकद, पीड़ितों को कॉल करने के लिए इस्तेमाल होते 31 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, डिग्री छापने के लिए 2 प्रिंटर और एक वाई-फाई राउटर बरामद किया है। इसके अलावा भारी मात्रा में फर्जी डिग्रियां, अंकतालिकाएं, कोरे पेपर और पीड़ितों के विवरण वाले रजिस्टर भी जब्त किए गए हैं। एडिशनल डीसीपी जसबीर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों का फिलहाल कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य संपर्कों और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करने के लिए गहन जांच कर रही है।

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