सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए पूर्वी जिला पुलिस की पहल; ‘प्रहरी’ योजना के तहत 100 सुरक्षा गार्डों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्वी जिला पुलिस ने कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत अपनी महत्वपूर्ण ‘प्रहरी’ योजना को सशक्त बनाने के लिए एक विशेष ‘प्रहरी मीटिंग’ और सुरक्षा गार्डों के ब्रीफिंग सत्र का आयोजन किया। 7 अप्रैल को प्रीत विहार थाना क्षेत्र के स्वास्थ विहार क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न आवासीय सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लगभग 100 सुरक्षा गार्डों ने भाग लिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निजी सुरक्षा गार्डों को पुलिस के एक विस्तारित अंग के रूप में विकसित करना है, ताकि वे अपने इलाकों में ‘फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ के तौर पर मुस्तैदी से काम कर सकें।

पूर्वी जिले के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम एडिशनल डीसीपी-I सुश्री सृष्टि पांडेय के मार्गदर्शन में और कम्युनिटी पुलिसिंग सेल द्वारा आयोजित किया गया। डीसीपी ने बताया कि प्रहरी योजना दिल्ली पुलिस की एक प्रमुख पहल है, जिसका लक्ष्य निजी सुरक्षा कर्मियों को पुलिस के सुरक्षा ढांचे के साथ जोड़ना है। कार्यक्रम के दौरान एटीओ, ब्रावो और कम्युनिटी पुलिसिंग सेल की प्रभारी महिला सब-इंस्पेक्टर शालिनी जादौन व उनकी टीम ने गार्डों को फील्ड ड्यूटी से संबंधित महत्वपूर्ण बारीकियों के बारे में विस्तार से समझाया।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान सुरक्षा गार्डों को संदिग्ध व्यवहार, लावारिस वस्तुओं और असामान्य गतिविधियों की पहचान करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। डीसीपी ने बताया कि गार्डों को आगंतुकों के उचित रिकॉर्ड संधारण, पहचान सत्यापन और अनाधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए सख्त एक्सेस कंट्रोल बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ की पहचान और आपातकालीन स्थिति में पीसीआर व स्थानीय पुलिस के साथ रियल-टाइम संवाद स्थापित करने के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम में गार्डों के लिए ‘क्या करें और क्या न करें’ की विस्तृत सूची साझा की गई, जिसमें बताया गया कि कैसे छोटी सी लापरवाही या संवेदनशील जानकारी साझा करने से सुरक्षा में बड़ी सेंध लग सकती है। गार्डों को आपातकालीन परिस्थितियों जैसे आग लगने, मेडिकल इमरजेंसी और अपराध स्थल को सुरक्षित रखने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया। डीसीपी ने कहा कि इस तरह के प्रयासों से स्थानीय स्तर पर सूचना साझा करने और अपराध रोकने में मदद मिलती है, जिससे पूरी दिल्ली के नागरिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित होता है।

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