रोहिणी से पुलिस ने दो ‘हिस्ट्रीशीटर’ दबोचे, चोरी की 18 गाड़ियां और पिस्टल बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के रोहिणी जिले की पुलिस ने वाहन चोरी और झपटमारी की वारदातों पर लगाम लगाते हुए दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी के 18 दोपहिया वाहन, तीन मोबाइल फोन, एक देशी पिस्तौल, जिंदा कारतूस और चोरी के अन्य सामान (वैक्यूम क्लीनर, किताबें और बैग) बरामद किए हैं। पकड़े गए दोनों आरोपी पुलिस रिकॉर्ड में ‘हिस्ट्रीशीटर’ हैं और उनके खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं।

रोहिणी जिले के डीसीपी शशांक जयसवाल ने बताया कि क्षेत्र में वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एसीपी प्रशांत विहार रामफूल मीणा के मार्गदर्शन में दो विशेष टीमें गठित की गई थीं। पहली टीम का नेतृत्व बुद्ध विहार थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मदन लाल मीणा ने किया। टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर बिट्टू उर्फ मंटा को उसके ठिकाने से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने दिल्ली भर में मोटरसाइकिल चोरी की कई वारदातों को स्वीकार किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी के 10 दोपहिया वाहन बरामद किए हैं। बिट्टू बुद्ध विहार थाने का घोषित अपराधी है और पहले से ही 13 आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।

दूसरी बड़ी कामयाबी थाना केएनके मार्ग की टीम को मिली, जिसका नेतृत्व एसएचओ प्रमोद आनंद कर रहे थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सक्रिय ऑटो-लिफ्टर रोहिणी क्षेत्र में आने वाला है। पुलिस ने रोहिणी सेक्टर-15 के एफ-ब्लॉक के पास जाल बिछाया और स्कूटी सवार नीरव उर्फ नीरज उर्फ पोली (27 वर्ष) को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक .315 बोर की देशी पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद हुआ। जांच में पता चला कि वह जिस स्कूटी पर सवार था, वह भी चोरी की थी। नीरज केएनके मार्ग थाने का हिस्ट्रीशीटर है और उस पर झपटमारी व चोरी के लगभग 45 मामले दर्ज हैं।

पुलिस की पूछताछ में नीरज ने खुलासा किया कि वह नशे का आदी है और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जुर्म की राह पर चल पड़ा। वह पहले डिलीवरी बॉय का काम करता था। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने 8 और वाहन, 3 मोबाइल फोन और चोरी किए गए बैग व किताबें बरामद की हैं। पुलिस ने इस संबंध में आर्म्स एक्ट और बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि उनसे जुड़े अन्य साथियों और चोरी के सामान को खरीदने वालों का पता लगाया जा सके।

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