ऑपरेशन ‘धरपकड़’ से मध्य दिल्ली में पुलिस का अपराधियों पर चौतरफा वार; एक महीने में सैकड़ों गिरफ्तार, करोड़ों की रिकवरी और 22 भगोड़े दबोचे

नई दिल्ली: दिल्ली के सेंट्रल जिला पुलिस ने ‘ऑपरेशन धरपकड़’ के तहत अपराधियों के खिलाफ एक व्यापक और निर्णायक अभियान चलाकर कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी सफलता हासिल की है। 1 मार्च से 31 मार्च तक चले इस सघन अभियान के दौरान पुलिस ने हत्या, लूट, झपटमारी, नशा तस्करी और अवैध हथियार रखने जैसे संगीन अपराधों में शामिल सैकड़ों अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान पुलिस ने न केवल अपराधों का खुलासा किया, बल्कि बड़े पैमाने पर चोरी की संपत्ति और नशीले पदार्थ भी बरामद किए हैं।

सेंट्रल जिले के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने आंकड़ों का विवरण देते हुए बताया कि मार्च महीने में झपटमारी के 16 मामलों में 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर 7 मोबाइल और सोने की चेन बरामद की गई। लूट के 4 मामलों में 9 बदमाश पकड़े गए, जिनसे नकदी और हथियार मिले। सेंधमारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 12 आरोपियों को दबोचा और उनके कब्जे से करीब 6.350 किलोग्राम चांदी के बर्तन व आभूषण, लैपटॉप और अन्य कीमती सामान बरामद किया। इसके अलावा, ऑटो लिफ्टिंग के मामलों में 37 चोरों को गिरफ्तार कर 33 वाहन बरामद किए गए हैं।

नशे और अवैध हथियारों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई सबसे प्रभावी रही। एनडीपीएस एक्ट के तहत 64 मामले दर्ज कर 73 तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनसे 7.2 किलो गांजा और 992 ग्राम स्मैक बरामद हुई। आर्म्स एक्ट में 42 आरोपियों को पकड़कर 35 चाकू, 2 पिस्टल और 4 देसी कट्टे जब्त किए गए। आबकारी अधिनियम के तहत 64 तस्करों को गिरफ्तार कर 11,772 क्वार्टर अवैध शराब बरामद की गई। जुए के खिलाफ कार्रवाई में 93 लोगों को पकड़ा गया और ₹90,000 से अधिक की नकदी जब्त की गई।

डीसीपी ने आगे बताया कि पुलिस ने केवल अपराध होने के बाद ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि अपराध रोकने के लिए प्रिवेंटिव एक्शन पर भी जोर दिया। इस दौरान दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत 21,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और विभिन्न धाराओं के तहत सैकड़ों लोगों के खिलाफ कलंदरा जारी किया गया। पुलिस ने इस एक महीने में 22 घोषित अपराधियों को भी ढूंढ निकाला। हत्या के एक मामले में 8 और हत्या के प्रयास के 3 मामलों में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस की त्वरित कार्यप्रणाली को दर्शाती है। सेंट्रल जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपराधियों के खिलाफ यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति आगे भी जारी रहेगी।

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