राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल का शून्यकाल नोटिस, झारखंड से दिल्ली तक महिला आयोग ठप होने पर जताई चिंता

नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सोमवार को संसद में देश भर के महिला आयोगों की खस्ताहाल स्थिति और उनमें व्याप्त रिक्त पदों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। शून्यकाल के दौरान दिए गए अपने नोटिस में उन्होंने देश में बढ़ते अपराधों और न्याय देने वाली संस्थाओं के बंद होने पर गहरी चिंता व्यक्त की। मालीवाल ने कड़े शब्दों में कहा कि देश में हर 15 मिनट में एक बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज होती है, लेकिन जब न्याय की उम्मीद में पीड़िता आयोग पहुंचती है, तो वहां ताले लटके मिलते हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से दिल्ली महिला आयोग समेत सभी ठप पड़े आयोगों को तुरंत सक्रिय करने की मांग की।

सदन को संबोधित करते हुए सांसद स्वाति मालीवाल ने आंकड़ों के जरिए एक डरावनी तस्वीर पेश की। उन्होंने बताया कि झारखंड महिला आयोग पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ा है, जहां 4000 से अधिक शिकायतें धूल फांक रही हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश में अध्यक्ष का पद छह साल से रिक्त है और 26,000 मामले लंबित हैं। दिल्ली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस दिल्ली महिला आयोग ने 2015 से 2024 के बीच 1.74 लाख केस सुलझाए और 40 लाख कॉल अटेंड कीं, उसे 2024 में राजनीतिक प्रतिशोध के चलते पंगु बना दिया गया। आज दिल्ली की महिलाओं के पास अपनी गुहार लगाने के लिए कोई सक्रिय संस्था नहीं बची है।

मालीवाल ने अपने आठ साल के कार्यकाल के दौरान किए गए साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशनों का स्मरण करते हुए सदन को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी टीम ने आधी रात को घर से निकलकर तस्करी के चंगुल से 39 नेपाली लड़कियों को छुड़ाया और कोठियों में बंधक बनाकर प्रताड़ित की जा रही मासूम बच्चियों को आजाद कराया। उन्होंने मध्य प्रदेश की उस तेजाब पीड़िता की कहानी भी साझा की, जिसने अंतिम सांस लेते हुए न्याय की भीख मांगी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग में न अध्यक्ष हैं और न सदस्य, तो ऐसी हजारों पीड़िताएं अब किसके पास जाएं?

सांसद ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर फंड रोककर और स्टाफ को हटाकर एक राष्ट्रीय मॉडल बन चुके संस्थान को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सभी महिला आयोगों में खाली पदों को अविलंब भरा जाए। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली महिला आयोग को उसी शक्ति और स्वायत्तता के साथ पुनर्जीवित करने की मांग की, जिसके लिए वह कभी जाना जाता था। मालीवाल ने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि न्याय देने वाले संस्थान ही बंद हो जाएंगे, तो अपराधी बेखौफ होंगे और समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।

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