दो मार्च को होलिका दहन, चार को होली, जान लें मुहूर्त; प्रतिपदा में रंगोत्सव का उत्सव
राष्ट्रीय जजमेंट
दो मार्च को आधी रात में ही होलिका दहन कर लेना शास्त्र सम्मत होगा। तीन मार्च को रात्रिकाल में पूर्णिमा नहीं मिल रही है इसलिए धर्मशास्त्रीय वचन से होलिका दहन करना ठीक नहीं है।
होलिका दहन और होली के मुहूर्त पर काशी के विद्वानों ने शुक्रवार को अपनी राय दी। उनका कहना है कि शास्त्रों के अनुसार दो मार्च की रात 11: 57 बजे से होलिका दहन का मुहूर्त है। चार मार्च को होली खेली जाएगी।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पूर्णमासी में होलिका दहन की जाती है। प्रतिपदा में होली खेली जाती है। दो मार्च को भद्रा है लेकिन लोकाचार को ध्यान में रखते हुए रात 11:57 बजे से होलिका दहन जा सकती है। शुद्धता के अनुसार, तीन मार्च को भी होलिका दहन की जा सकती है।
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कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति में होली सिर्फ एक लोकानुरंजक उत्सव नहीं बल्कि धर्म, दर्शन, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का समन्वित महापर्व है।
11:57 बजे से होलिका दहन का मुहूर्त
विश्वविद्यालय के ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र विभाग द्वारा फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, संवत् 2082 (ईस्वी सन् 2026) के अवसर पर होलिका पर्व के आयोजन के विषय में शास्त्रीय, ज्योतिषीय एवं धर्मशास्त्रीय प्रमाणों के गहन परीक्षण के बाद होलिका दहन धर्मशास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा यानी कि श्रावणी एवं फाल्गुनी पूर्णिमा में भद्रा काल में दहनादि कृत्य वर्जित है। दो मार्च को भद्रा है और भद्रा में होलिका दहन नहीं हो सकता लेकिन लोकाचार का पालन किया जा सकता है।
शास्त्रीय गणना के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:56 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:08 बजे तक विद्यमान रहेगी। 3 मार्च को सूर्योदय पूर्णिमा में ही होगा। 4 मार्च 2026 (बुधवार) को प्रतिपदा तिथि में जो अपराह्न तक विद्यमान रहेगी। होली का उत्सव मनाया जाना शास्त्रोचित होगा।
दो मार्च को आधी रात से होलिका दहन शास्त्र सम्मत : प्रो. विनय पांडेय
बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि धर्मशास्त्री वचनों के अनुसार जब रात में पूर्णिमा मिलेगी तभी होलिका जलाई जाएगी। लेकिन पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आरंभ होता है। यदि पूरी रात भद्रा मिल रही तो भद्रा का मुख भाग छोड़ कर धर्मसिंधु के अनुसार आधी रात से पहले ही भद्रा में भी होलिका जलाई जा सकती है।
इस साल पूर्णिमा का आरंभ 2 मार्च की शाम 5:21 बजे से हो रहा है। इसकी समाप्ति 3 मार्च की शाम 4:34 बजे हो रही है। दो मार्च को ही पूर्णिमा के साथ भद्रा भी लग रहा है। उसका मुख भाग रात्रि 2 बजकर कर 3 मिनट 45 सेकंड से रात 4 बजकर 3 मिनट 45 सेकंड तक रहेगा।
तीन मार्च को सुबह 4.56 बजे तक है भद्रा : प्रो.नागेंद्र
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि दो मार्च की रात 11:57 से रात 1:15 बजे तक भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। वैसे इसके बाद भी रात में होलिका दहन की जा सकती है। इसी दिन शाम 5:18 बजे से भद्रा का मान्य है जो 12 घंटे तक रहता है जो तीन मार्च की सुबह 4:56 बजे तक रहेगा। होलिका दहन के दौरान भद्रा के पुच्छ भाग होने की वजह से होलिका दहन सही रहेगी।
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