ट्रेन यात्रा के दौरान कॉल करने के बहाने फोन लिया और सिम पोर्ट कर क्रेडिट कार्ड से उड़ाए पैसे, दो सगे भाई गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के रोहिणी जिला की साइबर थाना पुलिस ने तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों के बैंक खाते खाली करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ‘सिम स्वैपिंग’ और ‘सिम पोर्टिंग’ के जरिए ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करने के आरोप में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ट्रेन यात्रा के दौरान एक महिला और उसके बेटे से दोस्ती की और फोन मांगने के बहाने उनका सिम पोर्ट कराकर क्रेडिट कार्ड से हजारों रुपये उड़ा लिए। पुलिस ने इनके पास से वारदात में प्रयुक्त मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड बरामद कर लिया है।

रोहिणी जिले के एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजीव रंजन ने बताया कि सेक्टर-06, रोहिणी निवासी वंदना गुप्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जनवरी माह में जब वह कानपुर से दिल्ली लौट रही थीं, तब ट्रेन में उनकी मुलाकात सचिन गुप्ता नामक युवक से हुई। सचिन ने खुद को बुराड़ी का निवासी बताया और बातचीत के दौरान महिला व उसके बेटे का विश्वास जीत लिया। यात्रा के दौरान उसने कॉल करने के बहाने दोनों के मोबाइल फोन लिए और कुछ देर बाद वापस कर दिए। अगले ही दिन महिला और उसके बेटे के सिम कार्ड अचानक डिएक्टिवेट (बंद) हो गए। इसके बाद 30 जनवरी को उनके क्रेडिट कार्ड से अनाधिकृत रूप से तीन बार में करीब ₹48,864 निकाल लिए गए।

एसीपी ऑपरेशंस ईश्वर सिंह के मार्गदर्शन और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रवीण चौहान के नेतृत्व में एसआई हिमांशु बालियान, हेड कांस्टेबल अविनीश, अनिल और रजनीश की टीम ने मामले की जांच शुरू की। तकनीकी विश्लेषण में पता चला कि दोनों मोबाइल नंबरों को फर्जी तरीके से जियो में पोर्ट किया गया था और इन्हें नितिन कुमार गुप्ता के नाम पर जारी करवाया गया था। पुलिस ने जब पैसों का पीछा किया, तो पता चला कि ठगी की रकम नितिन के कोटक महिंद्रा बैंक खाते और उसकी पत्नी प्रिया गुप्ता के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।

पूछताछ में मुख्य आरोपी सचिन कुमार गुप्ता (26) ने बताया कि वह जियो स्टोर का पूर्व कर्मचारी रह चुका है और उसे सिम जारी करने की प्रणाली की खामियों की पूरी जानकारी थी। उसने ट्रेन में फोन मांगने के बहाने पीड़ितों के मोबाइल से ‘पोर्टिंग रिक्वेस्ट’ जनरेट की और गुप्त रूप से ‘यूपीसी कोड’ नोट कर लिया। सबूत मिटाने के लिए उसने भेजे गए मैसेज भी डिलीट कर दिए। 24 जनवरी को उसने अपने भाई नितिन के नाम पर वे दोनों नंबर एक्टिवेट करा लिए। सिम चालू होते ही उसे बैंकिंग नोटिफिकेशन मिलने लगे। उसने क्रेड ऐप के जरिए क्रेडिट कार्ड का एक्सेस प्राप्त किया और ओटीपी के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कर लिए।

पुलिस ने बुराड़ी के नत्थूपुरा में छापेमारी कर दोनों भाइयों, सचिन कुमार गुप्ता और नितिन कुमार गुप्ता (23) को गिरफ्तार कर लिया। सचिन बीएससी सेकंड ईयर ड्रॉपआउट है और उबर के साथ काम करता था, जबकि नितिन बी.कॉम ग्रेजुएट है और एक मोटरसाइकिल शोरूम में काम करता था। पुलिस ने इनके पास से मोटोरोला G34 फोन और वह एटीएम कार्ड बरामद किया है जिससे ठगी की रकम निकाली गई थी। रोहिणी साइबर पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए लोगों को अनजान व्यक्तियों को अपना फोन न देने और अचानक सिम बंद होने पर तुरंत सावधानी बरतने की सलाह दी है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More