छेड़खानी का आरोप लगाकर कि थी लूट, दिल्ली पुलिस की उधमपुर के जंगलों में 8 दिन की घेराबंदी में ‘परवेज गैंग’ के गुर्गे गिरफ्तार, लाखों का माल व नगदी बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तरी जिला की थाना तिमारपुर और स्पेशल स्टाफ की टीम ने साहस और पेशेवर जांच की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूंज अब दिल्ली से जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों तक सुनाई दे रही है। पुलिस ने मजनू का टीला इलाके में एक व्यापारी से हुई ₹15 लाख नकद और ₹30 लाख के आई-फोन्स की सनसनीखेज लूट का खुलासा करते हुए 100% रिकवरी सुनिश्चित की है। इस ऑपरेशन के दौरान दिल्ली पुलिस की टीम ने पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर के दुर्गम जंगलों तक 1500 किलोमीटर से अधिक का सफर तय किया और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।

साजिश: छेड़खानी का झूठा आरोप लगाकर लूट

उत्तरी जिले के डीसीपी राजा बंठिया ने बताया कि 17 फरवरी को जम्मू निवासी रमेश लाल ने शिकायत दर्ज कराई थी। वह जम्मू से बस के जरिए दिल्ली आ रहे थे और उनके पास ₹15 लाख कैश व 22 एप्पल आई-फोन थे। जैसे ही वह मजनू का टीला पर बस से उतरे, तीन पुरुषों और तीन महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। महिलाओं ने उन पर छेड़खानी का झूठा आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। इसी गहमागहमी के बीच पुरुष आरोपी उनका कीमती सामान से भरा बैग लूटकर फरार हो गए। मौके पर मौजूद जनता और पुलिस की मदद से तीनों महिला आरोपियों (हाशु बीबी, जूना बेगम और मनीवा अख्तर) को तुरंत दबोच लिया गया, लेकिन मुख्य माल लेकर पुरुष आरोपी फरार होने में सफल रहे।

चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन: घने जंगल और पहाड़ियों में 8 दिन का शिकार

एसीपी बुराड़ी शशिकांत गौड़ के मार्गदर्शन में गठित पुलिस की विशेष टीमों ने जब जांच शुरू की, तो पता चला कि मास्टरमाइंड ‘परवेज’ के कहने पर सभी आरोपी जम्मू लौट चुके हैं। पुलिस की एक टीम ने चंडीगढ़ में दबिश देकर आरोपी मोहम्मद फारूक को उस समय गिरफ्तार किया, जब वह अग्रिम जमानत की फिराक में वकील से मिलने जा रहा था। वहीं, दूसरी टीम को सबसे बड़ी चुनौती उधमपुर के सुदूर गांव ‘फरोल’ में मिली। आरोपी तारिक हुसैन पुलिस से बचने के लिए घने जंगलों और पहाड़ियों में छिप गया था। पुलिस टीम ने कड़ाके की ठंड और अंधेरे के बीच बिना किसी बुनियादी सुविधा के कई रातें जंगलों में बिताईं। दुर्गम इलाका होने के कारण वहां मोबाइल नेटवर्क और सड़कें तक नहीं थीं, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी और करीब 25 किमी पैदल घने जंगलों की खाक छानने के बाद 8वें दिन तारिक को धर दबोचा।

पशुओं के बाड़े में दबाया था लूट का माल

पूछताछ के दौरान आरोपी तारिक ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि लूट का सारा माल उसने अपने घर में बने पशुओं के बाड़े (जहाँ जानवर रखे जाते हैं) की जमीन में गाड़ दिया था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर जमीन खोदकर ₹13 लाख नकद और 21 एप्पल आई-फोन बरामद किए। इससे पहले फारूक और महिलाओं से भी बरामदगी हो चुकी थी, जिससे पुलिस ने कुल ₹15 लाख नकद और ₹30 लाख के मोबाइल बरामद कर 100% रिकवरी का लक्ष्य हासिल किया।

मास्टरमाइंड परवेज अब भी फरार

जांच में सामने आया कि आरोपी तारिक की उधमपुर में अपनी बसें चलती हैं और फारूक एक ग्रेजुएट छात्र है जो एसएससी की तैयारी कर रहा था। इस पूरी डकैती का मास्टरमाइंड परवेज है, जिसने इन सबको दिल्ली में लूट की योजना के लिए तैयार किया था। परवेज को पता था कि व्यापारी भारी नकदी लेकर दिल्ली जा रहा है। फिलहाल पुलिस की टीमें परवेज की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। दिल्ली पुलिस की इस जांबाज टीम की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे पाताल में भी छिप जाए, कानून के हाथ वहां तक पहुँच ही जाते हैं।

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