शिकायत निवारण से लेकर पहियों की जांच तक; जानें कैसे AI बदल रहा है आपकी दिल्ली मेट्रो की तस्वीर

नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अब केवल एक परिवहन माध्यम नहीं, बल्कि तकनीक का नया पर्याय बनने जा रही है। मेट्रो ने अपने परिचालन, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू कर दिया है। भारत मंडपम में चल रहे ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में मेट्रो की इन उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है, जिसका अवलोकन खुद केंद्रीय शहरी विकास एवं बिजली मंत्री मनोहर लाल ने किया। उन्होंने मेट्रो की इस डिजिटल छलांग की जमकर सराहना की।

‘चेतना’ करेगी यात्रियों का मार्गदर्शन

मेट्रो ने यात्रियों की सहायता के लिए ‘चेतना’ नामक एक अत्याधुनिक चैटबॉट लॉन्च किया है। यह भारत-जीपीटी आधारित एजेंटिक एआई है, जो यात्रियों को यात्रा की योजना बनाने, किराए की जानकारी देने और टिकट बुक करने में मदद करेगा। खास बात यह है कि यह पूरी तरह सुरक्षित और स्वदेशी सर्वर पर आधारित है।

ओवरहेड तारों और पटरियों की हाईटेक निगरानी

मेट्रो की रेड, येलो और ब्लू लाइन पर अब ‘पेंटोग्राफ कोलिजन डिटेक्शन सिस्टम’ लगाया गया है। यह एआई आधारित सिस्टम ओवरहेड तारों की सेहत पर नजर रखेगा। यदि तार में कहीं कोई खराबी या अलाइनमेंट की समस्या आती है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा। इसी तरह, पिंक और मैजेंटा लाइन पर वीडियो एनालिटिक्स के जरिए एआई कैमरों से तारों की निगरानी की जा रही है।

पहियों और एक्सेल की सुरक्षा अब कंप्यूटर के हाथ

पिंक लाइन पर ‘ऑटोमैटिक व्हील प्रोफाइल मॉनिटरिंग सिस्टम’ पेश किया गया है। इसमें हाई-प्रिसिजन लेजर सेंसर लगे हैं, जो चलती ट्रेन के दौरान ही पहियों की स्थिति की जांच कर लेते हैं। इसके अलावा, एक्सेल बेयरिंग के तापमान की निगरानी के लिए भी एआई सिस्टम तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की आगजनी या घर्षण की संभावना को समय रहते रोका जा सके।

शिकायत निवारण और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस

मेट्रो ने अपनी हेल्पलाइन 155370 को भी एआई वॉयस बोट से लैस करने की योजना बनाई है। वहीं ग्रीन और वॉयलेट लाइन पर ‘प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस’ सिस्टम लागू किया गया है। यह तकनीक ट्रैक सर्किट में खराबी आने से पहले ही उसका पूर्वानुमान लगा लेगी, जिससे ट्रेनों की देरी में कमी आएगी और मरम्मत कार्य के लिए ट्रैक पर उतरने की मानवीय जरूरत कम होगी।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More