आरबीआई कर्मचारी बनकर ₹1.90 करोड़ की ठगी करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार

फरीदाबाद: फरीदाबाद पुलिस के साइबर क्राइम विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए आरबीआई कर्मचारी बनकर ₹1,90,78,699/- की डिजिटल ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने इस मामले में देहरादून और सहारनपुर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक व्यक्ति को डरा-धमकाकर उसके जीवन भर की जमा पूंजी हड़प ली थी। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आसिफ, काशिफ आजम और नदीम अहमद के रूप में हुई है।

पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम अभिषेक जोरवाल के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि सेक्टर-29 निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के पास 6 दिसंबर 2025 को एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को एयरटेल हेडक्वार्टर का कर्मचारी बताकर वाई-फाई कनेक्शन काटने की धमकी दी। इसके तुरंत बाद एक व्हाट्सएप कॉल आई, जिसमें खुद को आरबीआई कर्मचारी बताने वाले शख्स ने कहा कि पीड़ित के बैंक खातों और एफडी की जांच होनी है। ठगों ने पीड़ित को विश्वास में लिया कि वह अपना सारा पैसा आरबीआई के ‘पोर्टल’ द्वारा बताए गए खातों में आरटीजीएस कर दे, जांच के बाद पैसा वापस मिल जाएगा। डर और झांसे में आकर पीड़ित ने कुल ₹1,90,78,699/- ठगों के बताए खातों में भेज दिए।

जांच के दौरान साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उत्तराखंड के देहरादून और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में छापेमारी की। पुलिस ने नदीम अहमद को गिरफ्तार किया, जिसके बैंक खाते में ठगी के ₹26.60 लाख ट्रांसफर हुए थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी आसिफ और काशिफ आजम ने नदीम अहमद का बैंक खाता लेकर मुख्य ठगों को उपलब्ध कराया था। आरोपी नदीम पेशे से प्रॉपर्टी डीलर है, जबकि आसिफ और काशिफ प्लंबर का काम करते हैं।

पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार किन अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय गिरोहों से जुड़े हैं और ठगी गई शेष राशि कहाँ भेजी गई है। फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि आरबीआई या कोई भी बैंक कभी भी इस तरह फोन पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत 1930 पर दें।

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