चोरी की 5 मोटरसाइकिलों के साथ धरा गया शातिर ऑटो-लिफ्टर, 34 मामलों में रहा है शामिल

नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली जिला पुलिस की एएटीएस (AATS) टीम ने वाहन चोरी और स्नैचिंग की वारदातों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने सुल्तानपुरी थाने के घोषित बदमाश (बी.सी.) और शातिर अपराधी विपिन उर्फ भांजा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी के 5 दोपहिया वाहन बरामद किए हैं, जिससे दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज चोरी के 5 मामलों को सुलझाने का दावा किया गया है। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ पहले से ही लूट, झपटमारी और आर्म्स एक्ट के करीब 34 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

पश्चिमी जिले के डीसीपी दराडे शरद भास्कर ने बताया कि जिले में बढ़ती वाहन चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए एएटीएस टीम को सक्रिय किया गया था। इस दिशा में कार्रवाई करते हुए एसीपी ऑपरेशंस विजय सिंह के मार्गदर्शन और एएटीएस इंचार्ज इंस्पेक्टर मुकेश मीणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर रशीद खान, हेड कांस्टेबल होशियार, हेड कांस्टेबल कुलदीप, हेड कांस्टेबल नीरज, हेड कांस्टेबल देवेंद्र, कांस्टेबल नवीन और कांस्टेबल मनीष शामिल थे। टीम ने अपराध प्रभावित इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी।

गहन तकनीकी विश्लेषण और निरंतर फील्ड सर्विलांस के बाद, पुलिस टीम ने 14 फरवरी को घेराबंदी कर शातिर अपराधी विपिन उर्फ भांजा को दबोच लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके कब्जे से अलग-अलग इलाकों से चोरी की गई पांच मोटरसाइकिलें और स्कूटर बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह राजधानी के विभिन्न इलाकों में वाहन चोरी और स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस की इस कामयाबी से थाना जनकपुरी, तिलक नगर, अमन विहार, निहाल विहार और केशव पुरम में दर्ज वाहन चोरी के मामलों को सुलझा लिया गया है।

पकड़ा गया आरोपी विपिन (28) सुल्तानपुरी इलाके का रहने वाला है और वह एक आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ दर्ज 34 मुकदमों की लंबी फेहरिस्त बताती है कि वह समाज के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ था। पुलिस ने उसे धारा 35 बीएनएसएस के तहत गिरफ्तार कर संबंधित थानों को सूचित कर दिया है। डीसीपी ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि उसके अन्य साथियों और चोरी के वाहनों को ठिकाने लगाने वाले नेटवर्क का पता लगाया जा सके। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।

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