कांग्रेस के विकल्प के रूप में जनसंघ को स्थापित करने वाले महापुरुष थे दीनदयाल उपाध्याय: दिल्ली भाजपा

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को जनसंघ के संस्थापक और प्रखर विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को ‘समर्पण दिवस’ के रूप में मनाया। राजधानी के पं. दीनदयाल उपाध्याय उपवन में आयोजित मुख्य स्मृति सभा में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत कई दिग्गज नेताओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ और ‘अन्त्योदय’ के सिद्धांत को आधुनिक भारत के निर्माण की आधारशिला बताया।

स्मृति व्याख्यान देते हुए राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद जब दुनिया पूंजीवाद और साम्यवाद जैसे विचारों में उलझी थी, तब दीनदयाल जी ने एकात्म मानववाद का दर्शन दिया। उन्होंने कहा कि यह दीनदयाल जी के पुरुषार्थ का ही परिणाम था कि 1964 तक जनसंघ कांग्रेस के मजबूत विकल्प के रूप में उभरा और पहली बार दिल्ली नगर निगम चुनाव जीतकर किसी निकाय की सत्ता में आया। शिवप्रकाश जी ने जोर देकर कहा कि आज भाजपा के पास जो जनप्रतिनिधियों की विशाल फौज है, उसके पीछे उन संघर्षों की नींव है जिसे दीनदयाल जी ने रखा था।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने दीनदयाल जी को संगठन का ‘भगीरथ’ बताते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति को आजीविका नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम माना। सचदेवा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं असल में दीनदयाल जी के ‘अन्त्योदय’ के सपने को ही धरातल पर उतार रही हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि पं. दीनदयाल उपाध्याय को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करें।

राजधानी के सभी 14 जिलों में हुई सभाएं

दिल्ली भाजपा द्वारा आयोजित इस समर्पण दिवस कार्यक्रम के तहत राजधानी के सभी 14 जिला कार्यालयों में स्मृति सभाएं आयोजित की गईं। पं. दीनदयाल उपाध्याय उपवन में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी, योगेंद्र चांदोलिया, आदेश गुप्ता, विष्णु मित्तल समेत कई विधायक और निगम पार्षद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पं. दीनदयाल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने अनुशासन और समय के पालन पर भी जोर दिया।

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