दिल्ली के साकेत कोर्ट में दिव्यांग कर्मचारी ने काम के दबाव में दी जान, सुसाइड नोट में बयां किया दिल का दर्द

नई दिल्ली: दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। अदालत में अहलमद (क्लर्क) के पद पर तैनात हरीश सिंह महार ने कोर्ट कॉम्प्लेक्स की इमारत की ऊपरी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक 60 प्रतिशत दिव्यांग थे और लंबे समय से काम के भारी बोझ व मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। पुलिस को मौके से बरामद सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी पीड़ा साफ शब्दों में बयां की है।

मृतक हरीश सिंह महार ने नोट में लिखा- “मैं 60% दिव्यांग हूं और यह नौकरी मेरे लिए बहुत कठिन है। अहलमद बनने के बाद से नींद नहीं आती, सुसाइड के विचार आते थे। काम के दबाव ने मुझे तोड़ दिया। मैंने किसी को अपनी परेशानी नहीं बताई, सोचा था खुद संभाल लूंगा, लेकिन हार गया। किसी को मेरी मौत का जिम्मेदार नहीं ठहराता।” उन्होंने हाईकोर्ट से अपील भी की कि भविष्य में दिव्यांग कर्मचारियों को हल्का काम दिया जाए, ताकि कोई और ऐसा दर्द न झेले।

घटना सुबह करीब 10 आस पास की बजे की बताई जा रही है। हरीश सिंह महार (उम्र लगभग 43 वर्ष) फरीदाबाद के निवासी थे और वर्ष 2010 से कोर्ट स्टाफ के रूप में कार्यरत थे। हाल ही में वे डिजिटल ट्रैफिक कोर्ट में अहलमद के पद पर तैनात थे। परिसर में मौजूद स्टाफ और वकीलों ने घटना देखते ही हड़कंप मचा दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया और जांच शुरू कर दी है।

घटना के बाद कोर्ट स्टाफ, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हजारों खाली क्लेरिकल पदों को तुरंत भरने, वर्कलोड कम करने, दिव्यांग कर्मियों के लिए संवेदनशील नीति बनाने और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता की मांग की। कई लोगों ने ‘जस्टिस फॉर हरीश’ के नारे लगाए।

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