बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने दिल्ली पुलिस का अभियान: थानों में हुआ जागरूकता कार्यक्रम, ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी पर खास फोकस

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की आउटर डिस्ट्रिक्ट इकाई ने बुजुर्ग नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। “सिक्योर माइंड्स, सेफ लाइव्स” थीम के तहत जिले के सभी थानों में विशेष सत्र चलाए गए, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, ओटीपी ठगी और खासकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम से सतर्क रहने की जानकारी दी गई।

आउटर डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि ये कार्यक्रम पीआरओ, पुलिस हेडक्वार्टर्स और आईएफएसओ यूनिट के सहयोग से आयोजित किए गए। सभी थानों में बुजुर्गों को विभिन्न साइबर अपराधों जैसे फेक कस्टमर केयर कॉल्स, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया का दुरुपयोग और ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी के बारे में विस्तार से समझाया गया। कार्यक्रम में एसीपी/आईएफएसओ मनोज कुमार और एसीपी/एपीआरओ रंजय अत्रिश्य की लाइव सेशन दिल्ली पुलिस के यूट्यूब चैनल पर स्ट्रीम की गई।

इस दौरान बुजुर्गों को स्पष्ट बताया गया कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ की कोई व्यवस्था नहीं है। ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। कोई एजेंसी फोन पर जांच या गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है।

डीसीपी ने बताया कि अधिकारियों ने मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया इस्तेमाल के दौरान सावधानियां भी बताईं। अज्ञात व्यक्ति से पर्सनल डिटेल्स, बैंक जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी शेयर न करने और संदिग्ध कॉल तुरंत काटने की सलाह दी गई। साइबर क्राइम की शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1930 या पोर्टल का इस्तेमाल करने को कहा गया। कार्यक्रमों में बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी रही और उन्होंने अपने सवाल पूछे। ऐसे जागरूकता सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं ताकि समाज के कमजोर वर्ग को साइबर अपराधों से बचाया जा सके। दिल्ली पुलिस ऑनलाइन भी उतनी ही सुरक्षा प्रदान कर रही है जितनी ऑफलाइन।

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