चुनाव के नतीजे विपक्ष को अलीगढ़ से ताला खरीदने पर मजबूर कर देंगे: पीएम मोदी
जम्मू/अलीगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अलीगढ़ में चुनावी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पहले चरण के चुनाव के बाद विपक्ष का टिकना मुश्किल हो गया है। नतीजे उन्हें अलीगढ़ से ताला खरीदने पर मजबूर कर देंगे। जो लोग 40 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रहे, उनकी भी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा है। इससे पहले मोदी ने रविवार को जम्मू के कठुआ की सभा में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और कांग्रेस पर निशाना साधा।
प्रधानमंत्री ने कठुआ में कहा, ‘‘मैं कल की ही बात बताता हूं। हमारे पड़ोस की घटना है। पूरा देश जलियांवाला बाग (की घटना) के 100 साल पूरे होने पर शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा था, लेकिन इस अवसर पर भी कांग्रेस ने राजनीति कर ही डाली। देश के उपराष्ट्रपति जलियांवाला बाग गए थे…लेकिन सरकार के इस अधिकृत कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री गायब थे…क्योंकि वे परिवार की भक्ति में जुटे थे। वे राहुल के साथ तो जालियांवाला बाग गए, लेकिन उपराष्ट्रपति के साथ उन्होंने जाना ठीक नहीं समझा।’’
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कांग्रेस ने कभी सेना के पराक्रम और कौशल पर भरोसा नहीं किया। कांग्रेस के लिए यह सेना एक कमाई का साधन है। चाहे बोफोर्स हो, सबमरीन हो, हेलिकॉप्टर हो, मलाई खाने में उनका कोई जोड़ ही नहीं।
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कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के कारण देश के वीरोें के साथ न्याय नहीं किया। जब वे सर्जिकल स्ट्राइक या एयरस्ट्राइक पर सवाल उठा रहे होते हैं तो वे अपनी नाकामी छिपाते हैं।
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इस बार जम्मू-कश्मीर अपना सांसद नहीं चुन रहा, बल्कि नए भारत की अपनी नीति पर मुहर भी लगा रहा है। आपने देखा होगा कि कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी की महामिलावट किस तरह खुल के सामने आ गई।
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आए दिन ये लोग जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की धमकी दे रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के दो प्रधानमंत्री बनाने की बात कर रहे हैं। पहले पाकिस्तान भी न्यूक्लियर-न्यूक्लियर करके धमकाता रहता था, उसके न्यूक्लियर की हवा निकल गई कि नहीं? यह भी धमकियां दे रहे हैं…दो प्रधानमंत्री- दो प्रधानमंत्री…।
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कांग्रेस और उसके साथी, जम्मू कश्मीर के वंशवादी परिवार चाहे जितनी कोशिश कर लें, मोदी उनके सामने दीवार बनकर खड़ा है। मैं तीन-तीन पीढ़ी से यहां कब्जा जमाकर बैठे अब्दुल्ला परिवार और मुफ्ती परिवार को कहना चाहता हूं- यह मोदी है न बिकता है, न झुकता है, न डरता है।
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कांग्रेस के खून में ऐसे जर्म्स घुस गए हैं कि वह कह रही है जम्मू-कश्मीर से सेना हटा देगी। क्या जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की इच्छा के बिना यह हो सकता है? यह आपकी पीठ में छुरा घोंपने का काम है।
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आज भले ही कांग्रेस कश्मीरी पंडितों का नाम लेने से घबरा रही हो, लेकिन यह चौकीदार उन्हें उनकी जमीन दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह काम शुरू हो चुका है। जो लोग पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से यहां आए हैं हम उनकी नागरिकता के लिए भी काम कर रहे हैं।