फर्जी दस्तावेजों से बीमा कंपनी से रुपये निकालकर करोड़ों का चूना लगाने वाली गैंग का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशंस यूनिट ने बीमा पॉलिसी का पैसा फर्जी दस्तावेजों से निकालकर एक बीमा कंपनी को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ़्तार आरोपियों की पहचान 37 वर्षीय प्रेम प्रकाश निवासी चंदन विहार, 41 वर्षीय चंदन जैन निवासी रोहिणी, 41 वर्षीय सुजीत कुमार मिश्रा निवासी ककरोला, 30 वर्षीय विकास निवासी विजय नगर और 28 वर्षीय रोहित कुमार अग्रवाल निवासी ग्रेटर नोएडा के रुप में हुई है। आरोपियों के पास से 39 मोबाइल फोन, 55 पैन कार्ड, 33 आधार कार्ड, 32 वोटर कार्ड, 46 डेबिट कार्ड, 73 चेक बुक एवं पासबुक, 6 स्वाइप मशीन और 10 स्टैंप बरामद किया गया हैं।

स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट के डीसीपी प्रशांत गौतम ने बताया कि मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बीती 28 मार्च को शिकायत मिली थी। जिसमे बताया गया की उनके एक पॉलिसी होल्डर अब्दुल चौधरी की मौत हो गई थी, उनका 51 लाख रुपये का क्लेम फर्जी तरीके से किसी ने ले लिया है, कंपनी ने जांच में पाया था कि अब्दुल के घर से किसी ने बीमा राशि का दावा नहीं किया था, बल्कि किसी ने फर्जी दस्तावेज लगाकर क्लेम ले लिया गया है। कंपनी की ओर से जांच में पता चला कि किसी ने 22 लोगों की 37 पॉलिसी के 2.38 करोड़ रुपये के क्लेम फर्जी तरीके से ले लिए हैं।

टीम को जांच पता चला कि इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बंधन बैंक, यस बैंक, आईडीबीआई बैंक और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक में पॉलिसी धारक के नाम पर फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर अकाउंट खुलवाये गए है। अकाउंट खुलवाने के लिए ई-आधार ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया था. इन सभी अकाउंट में आया सारा पैसा रिंकू सेल्स नाम के अन्य अकाउंट में ट्रांसफर किया गया, जिसका प्रॉपराइटर प्रेम प्रकाश था। जिनका पता कबीर नगर, राणा प्रताप बाग, दिल्ली का था। हालांकि, उक्त पता ट्रेस नहीं हो पा रहा था। इसलिए, टीम ने बारीकी विश्लेषण कर अंत में चंदन विहार, संत नगर, बुराड़ी, दिल्ली में प्रेम प्रकाश के पते की पहचान करने में कामयाब रही। उसे पकड़ लिया गया और उससे पूछताछ के आधार पर चार और लोगों को टीम ने दबोचा।

रोहित कुमार अग्रवाल और सुजीत कुमार मिश्रा मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में वरिष्ठ कार्यकारी थे। उनके पास सभी पॉलिसी होल्डर्स का डाटा एक्सेस था। दोनों ने उन पॉलिसी होल्डर्स की डिटेल जिनकी पॉलिसी मैच्योर हो चुकी थी और क्लेम नहीं किया है, या पॉलिसी होल्डर की मौत हो चुकी थी और नॉमिनी को अभी तक पैसे का भुगतान नहीं हुआ था, सारा डाटा चंदन जैन को दिया।

प्रेम प्रकाश ने कुछ गरीब लोगों को थोड़े पैसे का लालच देकर उनका पैन कार्ड, आधार कार्ड पॉलिसी होल्डरों के नाम पर बनवाकर बैंक में फर्जी अकाउंट खुलवा लिया। विकास, जो आधार केंद्र में काम कर रहा था, 1000-1500 रुपये लेकर बिना कोई दस्तावेज लिए इन बदलावों को अपडेट करवा लिया। इसके बाद रोहित और सुजीत की मदद से सभी पॉलिसियों के लिए क्लेम का आवेदन किया गया।

पॉलिसी धारकों के नाम से खोले गए फर्जी बैंक खातों में रिफंड राशि प्राप्त हुई थी, जहां से अधिकांश राशि रिंकू सेल्स के बैंक खातों में भेजी थी। सभी अकाउंट में क्लेम का पैसा पहुंचने के बाद इन लोगों ने पैसे आपस में बांट लिए। रिंकू सेल्स के खाते चंदन जैन द्वारा संचालित किए जाते थे, जिनके कब्जे से सिम कार्ड खाता संख्या से जुड़ा हुआ था।

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