निजी अस्पतालों और एजेंसी की एंबुलेंस किराए के लिए अब मनमानी खत्म

आर जे न्यूज़

उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों और एजेंसियों द्वारा दी जाने वाली एम्बुलेंस  सेवाओं का किराया तय कर दिया है | अधिक चार्ज करने की स्थिति में चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और एम्बुलेंस का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा |

कोविड-19 महामारी को देखते हुए पूरे राज्य में निजी अस्पतालों और एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली एम्बुलेंस सेवाओं के लिए किराया संरचना में एकरूपता लाने का निर्णय लिया गया है | यह लोगों के लिए किफायती सेवा साबित होगा |

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सरकार ने चार प्रकार की एम्बुलेंस सेवाओं के लिए किराया तय किया है, टाइप ए या मेडिकल फर्स्ट रेस्पॉन्डर एम्बुलेंस पहले 10 किमी के लिए 500 रुपये और हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 10 रुपये चार्ज करेगी |

ये है बाकियों का किराया

टाइप बी या रोगी परिवहन एम्बुलेंस पहले 10 किमी के लिए 1,000 रुपये और उसके बाद प्रत्येक किलोमीटर के लिए 20 रुपये चार्ज करेगी | इसी तरह, टाइप सी या बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस और टाइप डी या एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस पहले 10 किमी के लिए क्रमशः 1,500 और 2,000 रुपये और प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 25 रुपये और 30 रुपये चार्ज करेंगी |

मिलेंगी ये सुविधाएं

टाइप बी, सी और डी एम्बुलेंस सेवाओं के किराए में ऑक्सीजन, एम्बुलेंस उपकरण, पीपीई किट, दस्ताने, मास्क, फेस शील्ड, सैनिटाइजर, ड्राइवर, आपातकालीन चिकित्सा टेक्नीशियन और डॉक्टर शामिल हैं |

प्रमुख सचिव परिवहन, राजेश कुमार सिंह ने कहा कि एम्बुलेंस को मोटर व्हीकल अधिनियम में परमिट और कर नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है, क्योंकि इसका संचालन एक सामाजिक सेवा है न कि व्यावसायिक उपयोग. हालांकि एम्बुलेंस सेवाओं के किराए को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर जिलों द्वारा अधिसूचना जारी की गई है, लेकिन दरों में भिन्नता है |

अंबेडकरनगर से अश्वनी कुमार रंजन की रिपोर्ट

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