मशहूर गीतकार राजेंद्र राजन का कोरोना से निधन
अपने गीतों से खुद को और सहारनपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले गीतकार राजेंद्र राजन (69) नहीं रहे। उन्होंने बृहस्पतिवार तड़के राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में अंतिम सांस ली। उन्हें करीब एक सप्ताह पहले बुखार आया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।
दो दिन पहले उन्होंने एंटीजन किट से जांच कराई थी, जो नेगेटिव आई। इसके बाद आरटीपीसीआर के लिए नमूना दिया था, जिसकी रिपोर्ट उनके निधन के बाद पॉजिटिव आई। वे अपने पीछे पत्नी विभा, बेटे मनोज और प्रशांत समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से साहित्य प्रेमियों में दुख की लहर है।
राजेंद्र राजन मूल रूप से गांव एलम (शामली) के रहने वाले थे। उनका जन्म बीएस शर्मा के घर नौ अगस्त 1952 को हुआ था। उन्होंने बीएससी सहारनपुर के महाराज सिंह कॉलेज से की। कई साल तक स्टार पेपर मिल में सेवारत रहे। सेवानिवृत्ति के बाद से उनका पूरा जीवन साहित्य को ही समर्पित रहा। गद्य तो राजन ने छात्र जीवन में ही लिखना शुरू कर दिया था, लेकिन उनकी मंचीय गीत यात्रा मेला गुघाल के कवि सम्मेलन से 1976 में शुरू हुई।
करीब साढे़ चार दशक की गीत यात्रा में राजन ने लालकिला, गीत चांदनी जयपुर और राष्ट्रपति भवन सहित कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश के सभी बड़े मंचों पर असंख्य कवि सम्मेलनों में अपने गीत पढ़े। कवि सम्मेलनों के अलावा मुशायरों में भी उन्हें खूब वाह-वाही मिलती रही। निर्भय हाथरसी, कुंवर बेचैन, भारत भूषण, संतोष आनंद, गोपालदास नीरज, शिशुपाल निर्धन, यशपाल जैन, रामरिख मनहर, रमानाथ अवस्थी, विजेंद्र अवस्थी, हरिओम पंवार सहित देश के कई साहित्य मनीषियों से उन्हें निरंतर असीम स्नेह और सराहना मिली।
वर्ष 2009 में अमेरिका के 16 शहरों में राजन ने अपनी गीत यात्रा की और वहां के गीत प्रेमियों को अपने गीतों से मंत्रमुग्ध कर दिया था। करीब चालीस साल पहले लिखा गया उनका गीत ‘मैं पात पात झर गया, तुम्हें भुलाने के लिए’ काव्य मंचों पर ऐसा चर्चित हुआ, जिसने राजन को देश भर में पहचान दी। वर्ष 1983 में उनका पहला काव्य संकलन ‘पतझर-पतझर सावन-सावन’ प्रकाशित हुआ।
वर्ष 2003 में गीत संग्रह ‘केवल दो गीत लिखे मैंने’ और वर्ष 2015 में दूसरा गीत संग्रह ‘खुश्बू प्यार करती है’ तथा 2017 में ग़जल संग्रह ‘मुझे आसमान देकर’ प्रकशित हुआ। इसके अतिरिक्त देश भर की पत्र-पत्रिकाओं में उनके अनेक गीत व रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।
साहित्यिक पत्रिका ‘शीतलवाणी’ का उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर वर्ष 2019 में एक विशेषांक भी प्रकाशित हुआ। प्रतिष्ठित कवि कुमार विश्वास ने तो उनका चर्चित गीत ‘आने वाले हैं शिकारी मेरे गांव में…अपने स्टूडियो में रिकॉर्ड कर प्रसारित किया था। वर्ष 2008 में ‘स्पर्श’ नाम से भी उनका एक ऑडियो कैसेट आया था।
…मौत जब फैसला सुनाती है
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