कभी थे आजम खान के धुर विरोधी, अब अखिलेश यादव के खासमखास, सुरेंद्र नागर का रामपुर कनेक्शन जानिए

राष्ट्रीय जजमेंट

लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक दलों में गहमागहमी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी ने जिस पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्‍पसंख्‍यक) समीकरण के सहारे 2024 लोकसभा चुनाव में जबरदस्‍त सफलता पाई थी, एक बार फिर उसे धार देने में जुट गई है। इसके तहत 26 फरवरी को लखनऊ स्थित दफ्तर में रामपुर और मुरादाबाद के कई नेताओं की सपा में जॉइनिंग कराई गई। इन नेताओं में बसपा में रहे रामपुर के नेता सुरेंद्र नागर भी शामिल हैं। वह बसपा सरकार में दर्जा प्राप्‍त मंत्री भी रहे थे।
सपा में सुरेंद्र नागर की जॉइनिंग के साथ ही अखिलेश यादव ने उनका कद भी बढ़ा दिया है। दो मार्च को नागर को सपा का प्रदेश सचिव बना दिया गया। चर्चा है कि इसको लेकर सपा के भीतर नाराजगी बढ़ गई है। दरअसल, रामपुर में बसपा में रहते हुए सुरेंद्र नागर वरिष्‍ठ सपा नेता आजम खान के धुर विरोधी माने जाते थे। बताया जा रहा है कि आजम खान से सहमति लिए बगैर सुरेंद्र नागर को सपा का प्रदेश सचिव पदभार सौंप दिया गया है। इससे वह नाराज बताए जा रहे हैं।
आजम को जल्‍द जेल से निकालेंगे: सुरेंद्र नागर
हालांकि, सपा में जॉइनिंग के समय सुरेंद्र नागर ने आजम खान के समर्थन में कई बातें कहीं। उन्‍होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि कानून के माध्‍यम से आजम खान को जल्‍द से जल्‍द जेल से बाहर निकाल जाए। समाजवादी पार्टी को आजम खान की जरूरत है। आजम खान जेल से बाहर आएंगे तो समाजवादी पार्टी और मजबूत होगी।

सुरेंद्र नागर ने आजम खान की तारीफ में पढ़े कसीदे
सुरेंद्र नागर ने अखिलेश यादव के सामने आजम खान की तारीफ में कसीदे पढ़े। उन्‍होंने कहा कि आजम खान समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक रहे हैं। मौजूदा सरकार ने उनके ऊपर बड़ा जुल्‍म किया है। उनको झूठों मुकदमों में जेल में बंद किया है। समाजवादी पार्टी को आजम खान की बहुत आवश्‍यकता है। जब किसी बड़े नेता पर कार्रवाई होती है तो पार्टी कमजोर होती है।
मुलायम और कांशीराम के पुराने रिश्‍तों की दिलाएंगे याद
सुरेंद्र नागर को सपा में अहम पद देने की वजह से आजम खान भले नाराज बताए जा रहे हों, लेकिन सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव जाटव और अन्‍य दलित समुदायों को पार्टी से जोड़ने के लिए किसी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं। सपा ने 15 मार्च को कांशीराम जयंती पर पूरे यूपी में बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। इसमें पार्टी नेता जनता को मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के पुराने रिश्‍तों के बारे में बताएंगे। हालांकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस पर आपत्ति जताई है, पर अखिलेश यादव पूरी तरह चुनावी मूड में नजर आ रहे हैं।

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