कहीं लो वोल्टेज से परेशान तो कहीं ट्रांसफार्मर की समस्या तो वही कचहरी चौक में कृषि बिल को लेकर धरने पर बैठे किसान नहीं सुन रहा प्रशासन

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कटनी/ढीमरखेड़ा/रीठी। किसानों की फजीहत कोई सुनने को तैयार नहीं कहीं लाइट की समस्या तो कहीं धान खरीदी में भ्रष्टाचार तो कृषि बिल को लेकर पूरे देश के किसान पीड़ित हैं जिससे किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है सभी आला अधिकारी किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते जिससे किसान पीड़ित हैं एवं दिन पा दिन बिछड़ते जा रहे. भारत को कृषि प्रधान देश सदियों से बताया जा रहा है। सरकारें भी कागजों में खूब कृषि को लाभ का धंधा बनाने का ढिंढोरा पीट रही है। नित नई योजनाओं का दावा किया जा रहा है।

कृषि कार्य के लिए 10 घंटे निर्बाध रूप से बिजली देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन गांव में विकास और सुविधाओं की हकीकत दावों से एकदम इतर है। किसानों को न तो पर्याप्त बिजली मिल रही और ना ही कोई विशेष सुविधाएं। रबी सीजन की बोवनी का समय लगभग समाप्ति की ओर है, लेकिन अबतक किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही। यह कहना है कि ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के अंतर्वेद में रहने वाले किसानों का। किसानों ने पत्रिका से पीड़ा बयां करते हुए कहा कि वर्षों से सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा।

रमेश पांडेय, सुशील पटेल, अशोक बागरी, सुरेंद्र पटेल, खिल्लू पटेल, श्याम पटेल, संतकुमार पटेल, अर्जुन पटेल, राकेश यादव, सतीश बर्मन, मंगल आदिवासी, कढ़ोरी यादव, रामविशाल पटेल, करिया पटेल, भजन पटेल, कुंजबिहारी पटेल, जितेंद्र पटैल, जगत पटेल आदि ने बताया कि गांव में एक सैकड़ा से अधिक किसानों के खेतों में नलकूप हैं, लेकिन विद्युत व्यवस्था न होने, ट्रिपिंग व लो वोल्टेज की समस्या के कारण किसान परेशान हैं। कभी पंप खराब हो जाता है तो कभी फाल्ट आ जाता है, जिसके चलते समय पर सिंचाई नहीं कर पाते और इसका सीधा असर फसलों पर पड़ता है। उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे आमदनी नहीं होती और नुकसान होने से किसान की कमर टूटती है।

टूटती किसानों की कमर

रीठी क्षेत्र में भी किसानों को पूरी बिजली ना मिलने की वजह से फसलें सूख रही है जिससे किसान परेशान हैं कई बार शासन प्रशासन से,रीठी क्षेत्र के ग्रामीणों के द्वारा बात अधिकारियों से रखी गई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा जिसके चलते किसान बहुत ही परेशान हैं कहने के लिए तो अन्नदाता है लेकिन यह सब कहने की बातें हैं हर जगह किसानों को पीड़ित किया जा रहा है जिससे किसान अपनी मांगों को लेकर समय-समय पर धरने पर बैठते रहे हैं पूर्व में भी,रीठी,में किसान कृषि बिल को लेकर धरने पर बैठ चुके हैं और आज भी कचहरी चौराहे में किसान कृषि बिल को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं जहां पर उन्होंने अपनी व्यथा बताते हुए शासन प्रशासन को चेताया

कटौती से किसान परेशान
सतीश बर्मन, मंगल आदिवासी, कढ़ोरी यादव, रामविशाल पटेल, करिया पटेल, भजन पटेल आदि ने बताया कि कृषि के लिए 10 घंटे बिजली देने का वादा थोथा है। कभी भी पूरे 10 घंटे बिजली नहीं मिलती। किसानों को यदि पर्याप्त बिजली मिले तो वे धरती में सोना पैदा करें, लेकिन किसानों के हितों के लिए न तो प्रशासनिक अधिकारी और ना ही जनप्रतिनिधि कोई ध्यान नही दे रहे।

गांव में बजबजा रही गंदगी
सुरेंद्र पटेल, खिल्लू पटेल, श्याम पटेल, संतकुमार पटेल, अर्जुन पटेल, राकेश यादव आदि ने बताया कि गांव में हमेशा गंदगी का आलम रहता है। ग्राम पंचायत द्वारा नालियों की सफाई समय पर नहीं कराई जा रही, जिससे दुर्गंध आती और संक्रमण का खतरा बना रहता है, जबकि जिला प्रशासन, प्रदेश व केंद्र सरकार का सफाई पर विशेष फोकस है। स्वच्छता के नाम पर गांव में महज औपचारिकता हो रही है।

पेयजल की गंभीर समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य मार्ग का निर्माण होने से सड़क ऊंची हो गई है। गांव में बारिश का पानी भर जाता है, जिससे गांव में जलभरा की स्थिति बनती है। इस समस्या से निपटले के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो रही। जिससे ग्रामीणों को खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। नलजल योजना का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा। धान खरीदी न होने से किसान परेशान हैं। समय पर कर्ज नहीं चुका पा रहे। इन दिनों शादी-विवाह का सीजन है, ऐसे में भुगतान न होने से हर किसी को परेशानी हो रही है।

इनका कहना है
ग्रामीणों को समस्या को दिखवाया जाएगा। पेयजल को लेकर क्या समस्या है तत्काल सचिव को तलब करेंगे। विद्युत कटौती हो रही है तो उसे ठीक कराया जाएगा। ग्रामीणों को परेशानी न हो इस दिशा में पहल होगी।

सपना त्रिपाठी, एसडीएम ढीमरखेड़ा

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