बढ़ी किसानों की मुश्किलें, हार्वेस्टर बगैर कैसे हो गेहूं की कटाई?
- बड़े पैमाने पर कटाई को मशीनें पंजाब व हरियाणा से हर साल आती रहीं
- लॉकडाउन में राज्यों की सीमाएं सील होने से मशीनों का आवागमन ठप
लखनऊ। अप्रैल का दूसरा सप्ताह शुरू होने जा रहा है और ऐसे में गेहूं की फसल तकरीबन पककर खेतों में तैयार खड़ी हैं। एक हफ्ते के भीतर उनकी कटाई की जरूरत पड़ेगी, लेकिन पूरे यूपी के किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं कि आखिर गेहूं की कटाई होगी कैसे? दरअसल, कोरोनावायरस की सक्रियता के चलते सोमवार को जब अपर मुख्य सचिव गृह का जब यह बयान आया कि जब तक प्रदेश में कोरोना का एक भी केस होगा, तब तक लॉकडाउन खोलने की स्थिति में हम नहीं आ सकते हैं।
यानि आगामी 15 अप्रैल को चरणबद्ध और कुछ रणनीतिक तरीके से लॉकडाउन को नहीं खोला जा सकता है। अब ऐसी विषम परिस्थिति में जब तक लॉकडाउन रहेगा तब तक प्रदेश में कृषि कार्यों सहित अन्य सभी कार्य भी प्रभावित रहेंगे,और इसका बड़ा असर गेहूं की कटाई पर पड़ता दिख रहा है।
गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश में गेहूं की कटाई के लिए बड़े पैमाने पर हार्वेस्टर मशीनें पंजाब और हरियाणा से हर साल आया करती थी, लेकिन इस बार सीमाएं सील होने और लॉकडाउन की वजह से मशीनों का आ पाना संभव नहीं दिखाई दे रहा है।पंजाब में तो कर्फ्यू ही लगा हुआ है। हालांकि यूपी में कुछ हार्वेस्टिंग मशीनें जरूर हैं लेकिन जोत के मुकाबले ये ऊंट के मुंह मे जीरे के समान ही है। अभी भी 70 फीसदी गेहूं की कटाई दूसरे राज्यों से आने वाली मशीनों (हार्वेस्टर) से ही किया जाता है।
राजधानी के गांधी ग्राम बगहा के अधिवक्ता रामकुमार सिंह ने 50 बीघा गेहूं लगा रखा है।अगले 4-5 दिन में फसल कटाई के लिए तैयार हो जाएगी, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा कि यह कटाई होगी कैसे? कटाई के लिए गांव में मजदूरों की कमी तो पिछले 10 सालों से चल रही है, लेकिन उसकी कमी दूसरे राज्यों से आने वाली हार्वेस्टर मशीनें पूरी कर देती थीं।
अब यह संकट बहुत बड़ा होता जा रहा है। लखीमपुर खीरी जिले के मितौली तहसील क्षेत्र के कचियानी गांव के किसान एसपी सिंह सिंह ने जो 150 बीघे गेहूं लगा रखा है, इन्होंने भी कुछ ऐसी ही समस्या बताई।उन्होंने बताया कि आज के दौर में मजदूरों से गेहूं की कटाई संभव नहीं है।क्योंकि हार्वेस्टर की आदत पड़ने से कटाई के बाद थ्रेशिंग की भी मशीन किसी के पास उपलब्ध नहीं है।
दूसरी तरफ श्रमिकों की भी भारी कमी है। गांव में जो खेती करने वाले श्रमिक मौजूद हैं उनसे इतने बड़े पैमाने पर गेहूं की कटाई संभव नहीं हो पाएगी। हालांकि बुंदेलखंड की बात करें तो झांसी में लगभग 20 बीघे पर गेहूं की पैदावार करने वाले शिव नारायण सिंह परिहार ने बताया कि बुंदेलखंड में चारे की जरूरत को लेकर हार्वेस्टर के साथ-साथ हाथ से भी गेहूं की कटाई होती रही है, और इसका फायदा इस समय मिलता दिख रहा है। स्थानीय किसानों की कुछ हार्वेस्टर मशीनें गेहूं की कटाई कर रही हैं।
15 अप्रैल से शुरू होनी है होगी सरकारी गेहूं खरीद
किसानों से सीधे गेहूं खरीदने के लिए प्रदेश सरकार 4479 खरीद केंद्र खोलेगी। सरकारी खरीद प्रदेश में 15 अप्रैल से शुरू होनी है। हर साल गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू होती है लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण हुए लॉक डाउन के चलते सरकारी खरीद समय से शुरू नहीं हो पाई। अब प्रदेश सरकार ने तय किया है कि खरीद 15 अप्रैल से होगी।
इसके लिए खाद्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि खरीद केंद्र क्रियाशील करने के लिए सभी आवश्यक बंदोबस्त कर लिए जाएं।प्रदेश सरकार गेहूं खरीद नीति पहले ही घोषित कर चुकी है। खरीद का लक्ष्य 55 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य 19. 25 प्रति कुंतल की दर पर खरीद होगी। खरीद का भुगतान किसानों के खाते में किया जाएगा।
प्रदेश में खाद्य विभाग के अलावा 9 एजेंसियां गेहूं खरीद करेंगी। सर्वाधिक खरीद केंद्र पीसीएफ के 2516 होंगे। इसके अलावा खाद्य विभाग 715, यूपी एग्रो 172 , यूपीपीसीयू 321, एसएफसी 73, कल्याण निगम 116, नेफेड 715, एफसीआई 94, यूपीएसएस 284 और एनसीसी एफ 73 केंद्र खोलेंगे।