दिल्ली पुलिस ने ई-रिक्शा पार्किंग में रंगदारी मांगने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़; 6 आरोपी गिरफ्तार, चाकू बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिले की जहांगीरपुरी थाना पुलिस टीम ने स्थानीय व्यापारियों और वाहन चालकों को डरा-धमकाकर अवैध वसूली करने वाले एक खतरनाक सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए एक ई-रिक्शा पार्किंग संचालक से साप्ताहिक हफ्ता मांगने, विरोध करने पर चाकू से हमला करने और वाहनों में तोड़फोड़ करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।

गिरफ्तार वयस्क आरोपियों की पहचान प्रिंस उर्फ संजू (28), ऋषभ उर्फ सूरी (22) और खेमा उर्फ गिरीश (22) के रूप में हुई है, जो सभी जहांगीरपुरी के विभिन्न ब्लॉकों और धोबी घाट झुग्गियों के रहने वाले हैं। इसके साथ ही वारदात में सक्रिय 3 नाबालिगों को भी कानून के दायरे में लिया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त दो धारदार चाकू बरामद किए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पकड़े गए तीनों वयस्क आरोपी बेहद शातिर और आदतन अपराधी हैं, जो पहले से ही लूटपाट और लड़ाई-झगड़े जैसे 5 आपराधिक मामलों में शामिल रह चुके हैं।

उत्तर-पश्चिम जिले की डीसीपी आकांक्षा यादव ने बताया कि 20 मई की मध्य रात्रि लगभग 02:30 बजे जहांगीरपुरी के धोबी घाट में ई-रिक्शा पार्किंग चलाने वाले 43 वर्षीय रियाजुद्दीन ने पुलिस को एक जानलेवा हमले और रंगदारी की सूचना दी। पीड़ित ने बताया कि संजू, सूरी, खेमा और 3 किशोर अवैध हथियारों से लैस होकर जबरन उसकी पार्किंग में घुस आए। उन्होंने पार्किंग संचालक से साप्ताहिक हफ्ता देने की मांग की। जब पीड़ित ने इसका कड़ा विरोध किया, तो आरोपियों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया और उसके दाहिने हाथ पर चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। वारदात को आगे बढ़ाते हुए बदमाशों ने इलाके में अपना खौफ पैदा करने के लिए वहां खड़े कई ई-रिक्शाओं के आगे के शीशे पत्थरों और हथियारों से तोड़ दिए और पीड़ित को जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। शिकायत के आधार पर थाना जहांगीरपुरी में बीएनएस की संबंधित धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

मामले की संवेदनशीलता और इलाके में बढ़े तनाव को देखते हुए जहांगीरपुरी सब-डिवाइजन के एसीपी योगेंद्र खोखर के निकट पर्यवेक्षण और जहांगीरपुरी के एसएचओ इंस्पेक्टर सतविंदर सिंह के नेतृत्व में दो समर्पित विशेष टीमों का गठन किया गया, जिसकी कमान सब-इंस्पेक्टर दीपक कुमार को सौंपी गई। इस टीम में हेड कांस्टेबल दिनेश मीणा, सुनील और कांस्टेबल योगेश शामिल थे। टीम को आरोपियों की पहचान कर उन्हें तुरंत दबोचने के आदेश दिए गए थे।

जांच टीम ने स्थानीय खुफिया तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली। मुस्तैद पुलिस टीम ने कड़ी मशक्कत और सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर तीनों मुख्य आरोपियों और उनके 3 नाबालिग सहयोगियों को जहांगीरपुरी इलाके से ही सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया।

गहन पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि वे जहांगीरपुरी क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करना चाहते थे। वे स्थानीय ई-रिक्शा चालकों और पार्किंग मालिकों को डरा-धमकाकर जबरन हफ्ता वसूलते थे। उस रात भी वे पार्किंग मालिक में दहशत पैदा करने के लिए नाबालिगों को आगे रखकर चाकू और पिस्टल के साथ पहुंचे थे और मांग पूरी न होने पर तोड़फोड़ की थी।

पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि आरोपी प्रिंस उर्फ संजू और ऋषभ उर्फ सूरी के खिलाफ पहले से 2-2 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि खेमा उर्फ गिरीश भी एक अन्य मामले में वांछित रहा है। पुलिस ने पकड़े गए तीनों वयस्क आरोपियों को माननीय अदालत के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया है, जबकि तीनों किशोरों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया है। जहांगीरपुरी थाना पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने इलाके में और किन-किन लोगों से रंगदारी वसूली थी।

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