दिल्ली से गोवा और राजस्थान तक फैला था ठगी का जाल, फोन अपडेट के बहाने पेटीएम हैक कर उड़ाते थे लाखों रुपये, दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार, थार एसयूवी और कैश बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के आउटर-नॉर्थ जिले की साइबर थाना पुलिस टीम ने अंतरराज्यीय स्तर पर संचालित होने वाले एक बेहद हाईटेक साइबर धोखाधड़ी और अवैध कैश-कन्वर्जन सिंडिकेट का पूरी तरह भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए दिल्ली से लेकर गोवा के समंदर तटों और राजस्थान के ठिकानों तक फैले इस नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है। पुलिस टीम ने गोवा के मडगांव में एक सफल और नाटकीय छापेमारी करते हुए इस गिरोह के दो मुख्य मास्टरमाइंडों को धर दबोचा।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अर्जुन लाल यादव (29) निवासी जयपुर, राजस्थान और दीपेंद्र महला (25) निवासी सीकर, राजस्थान के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त एक शानदार महिंद्रा थार एसयूवी, ₹1,95,000 नगद कैश, एक लैपटॉप, 4 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड और 3 चेक बुक बरामद की हैं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अब तक इस नेटवर्क के जरिए करीब 40 लाख रुपये के डिजिटल फ्रॉड के पैसे को अवैध रूप से कैश में बदल चुका है।

आउटर-नॉर्थ जिले के डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने बताया कि इस सनसनीखेज साइबर रैकेट का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि एक सामान्य ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर/सिस्टम अपडेट के दौरान उसका मोबाइल फोन पूरी तरह हैक और कॉम्प्रोमाइज हो गया। इस तकनीकी खामी का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने उसके और उसकी मां के बैंक खातों से जुड़े पेटीएम अकाउंट का अनधिकृत एक्सेस हासिल कर लिया और महज कुछ ही मिनटों में ₹1,50,000 की रकम उड़ा ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए आउटर-नॉर्थ साइबर थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर एक आक्रामक तकनीकी जांच शुरू की गई।

नॉर्दर्न रेंज के जॉइंट सीपी विजय सिंह के कुशल नेतृत्व और एडिशनल डीसीपी अमित कौशिक के करीबी निरीक्षण में एसीपी (ऑपरेशन्स) दिनेश कुमार और साइबर थाना एसएचओ इंस्पेक्टर गोविंद सिंह के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में सब-इंस्पेक्टर रवि राणा, हेड कांस्टेबल संदीप और जगजीत शामिल थे। जांच के दौरान सब-इंस्पेक्टर रवि राणा ने जब वित्तीय लेन-देन के ट्रेल का फॉरेंसिक विश्लेषण किया, तो एक चौंकाने वाला सुराग हाथ लगा। ठगी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा—₹98,000—तुरंत ही वास्को, साउथ गोवा स्थित ‘ओम श्री वेतोबा एचपी सर्विस स्टेशन’ पर सेटल किया गया था।

दिल्ली पुलिस की टीम ने तुरंत स्थानीय इनपुट्स और तकनीकी सर्विलांस को मजबूत किया, जिससे एक सोचे-समझे कैश-कन्वर्जन नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। आरोपी एक समर्पित व्हाट्सएप नंबर के माध्यम से डिजिटल फ्रॉड के पैसों की एंट्री प्राप्त करते थे। जैसे ही ऑनलाइन ट्रांसफर की पुष्टि होती थी, वे एक निश्चित कमीशन काटकर पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से फ्रॉड के डिजिटल मनी को सीधे हाथ में लिए जाने वाले अनट्रेसेबल कैश में बदल देते थे। डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच से पता चला कि यह सिंडिकेट इस व्यावसायिक नेटवर्क के माध्यम से ₹40 लाख से अधिक की राशि ठिकाने लगा चुका है।

सटीक तकनीकी लोकेशन मिलने के बाद आउटर-नॉर्थ साइबर पुलिस की टीम ने साउथ गोवा में एक सरप्राइज रेड की और घेराबंदी करके दोनों मास्टरमाइंडों—अर्जुन लाल यादव और दीपेंद्र महला को मडगांव से सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। गहन पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि वे इस कैश-कन्वर्जन मशीनरी के मुख्य सूत्रधार हैं। गोवा के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से डिजिटल मनी को कैश में बदलने के बाद, यह पेपर करेंसी व्यवस्थित रूप से राजस्थान में बैठे गिरोह के वरिष्ठ हैंडलर और सरगनाओं तक पहुँचाई जाती थी। पुलिस ने आरोपी दीपेंद्र महला के पास से वह मोबाइल फोन भी लाइव बरामद कर लिया है, जिसमें ठगी के लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाली व्हाट्सएप हॉटलाइन चल रही थी।

पुलिस ने बरामद थार एसयूवी, लैपटॉप, कैश और बैंक दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है और दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। दिल्ली पुलिस अब इस पूरे वित्तीय अपराध के ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करने, बैंक खातों को फ्रीज करने और राजस्थान में छिपे बैठे इस सिंडिकेट के मुख्य आकाओं को दबोचने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

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