म्यांमार से दिल्ली-NCR तक फैले इंटरनेशनल हेरोइन तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश; ₹16 करोड़ की ड्रग्स के मुख्य सप्लायरों सहित 9 गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के रोहिणी जिला अंतर्गत ‘स्पेशल स्टाफ’ की टीम ने एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सप्लायरों समेत कुल 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 1568 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन और 506 ग्राम कच्चा अफीम बरामद किया है। बाजार में इस कच्चे माल से बनने वाली हेरोइन की कुल कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल होने वाली एक बोलेरो कार और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की है। जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा से कच्चे माल की खेप लेकर मणिपुर, उत्तर प्रदेश के बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी और हापुर होते हुए दिल्ली-NCR में ड्रग्स की सप्लाई करता था। बुद्ध विहार थाने में दर्ज एफआईआर के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क की ‘बैकवर्ड लिंकेज’ को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। गिरफ्तार आरोपितों में समीर अहमद, आशीष सोनी, मनोज सोनी, संध्या, मेहनाज उर्फ बेजी, यूनुस, शब्बीर, मोहम्मद इस्तफाम और फुंद्रैमायुम अमजद अली शामिल हैं, जिनमें से कई का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है।

रोहिणी जिले के डीसीपी शशांक जायसवाल के निर्देशानुसार, स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर संदीप गोदारा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम में एसआई अशोक, एएसआई हरजीत, विनोद, राजेश, हेड कांस्टेबल विकास सांगवान, विनोद, मंदीप, राजीव और कांस्टेबल अजय शामिल थे। इस टीम ने रोहिणी और आसपास के इलाकों में नार्कोटिक्स की जड़ों को उखाड़ने के लिए लगातार सर्विलांस और फील्ड ऑपरेशन चलाया। मामले की शुरुआत तब हुई जब पुलिस ने स्थानीय स्तर पर सप्लाई करने वाले समीर अहमद और आशीष सोनी को 300 ग्राम हेरोइन के साथ दबोचा था। पूछताछ में पता चला कि ये दोनों पहले कॉस्मेटिक डिलीवरी और जेप्टो डिलीवरी बॉय का काम करते थे, जिन्हें मोटे कमीशन का लालच देकर ड्रग्स के धंधे में उतारा गया था। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने मुख्य सप्लायर मनोज सोनी को गिरफ्तार किया, जिसके बाद कड़ियों से कड़ियां जुड़ती चली गईं और एक के बाद एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।

मनोज सोनी से मिली गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल स्टाफ की टीम ने 21 अप्रैल को दिल्ली के तिलक नगर इलाके में छापेमारी कर संध्या (30 वर्ष) नाम की महिला को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 278 ग्राम हेरोइन मिली। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि संध्या का पूरा परिवार ही इस काले कारोबार में लिप्त है। उसका पति विक्की उर्फ आकाश पहले से ही 16 आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के चलते एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल में बंद है, जबकि उसकी सास सीमा भी इसी जुर्म में जेल की सलाखें गिन रही है। संध्या से पूछताछ के बाद पुलिस टीम उत्तर प्रदेश के बरेली पहुंची, जहां 7 मई को इस नेटवर्क की एक और अहम कड़ी मेहनाज उर्फ बेजी (51 वर्ष) को 58 ग्राम हेरोइन के साथ दबोचा गया। मेहनाज बरेली क्षेत्र में ड्रग्स की बड़ी सप्लायर थी और उस पर पहले से ही एनडीपीएस के दो मामले दर्ज हैं।

जांच का दायरा तब और बढ़ गया जब मेहनाज की निशानदेही पर पुलिस ने 12 मई को शाहजहांपुर से यूनुस (28 वर्ष) नाम के तस्कर को गिरफ्तार किया, जिसके कब्जे से 578 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। यूनुस ने पूछताछ में कुबूल किया कि वह उत्तर प्रदेश के हापुर में स्थित एक अवैध ड्रग फैक्ट्री से जुड़ा हुआ था, जहां कच्चे अफीम में केमिकल मिलाकर हेरोइन तैयार की जाती थी। इसके बाद 17 मई को बाराबंकी से शब्बीर (40 वर्ष) को 300 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया। यूनुस ने पुलिस के सामने यह बड़ा राज उगला कि ड्रग्स बनाने के लिए कच्चा माल (क्रूड ओपियम) सीधे मणिपुर से मंगवाया जाता था। इस इनपुट के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम तुरंत इंफाल के लिए रवाना हुई।

इंफाल में स्थानीय खुफिया तंत्र और लगातार सर्विलांस के जरिए 20 मई को पुलिस टीम ने थौबाल जिले के रहने वाले दो मुख्य सरगनाओं—मोहम्मद इस्तफाम (28 वर्ष) और फुंद्रैमायुम अमजद अली (34 वर्ष) को रंगे हाथों दबोच लिया। ये दोनों तस्कर एक बोलेरो कार के गियरबॉक्स के भीतर विशेष केविटी बनाकर उसमें 506 ग्राम कच्चा अफीम छिपाकर ले जा रहे थे। बरामद कच्चा माल अफीम के पौधों से निकाला गया शुद्ध अफीम है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस 506 ग्राम कच्चे माल से रिफाइनिंग प्रक्रिया के बाद 1.5 से 2 किलोग्राम उच्च दर्जे की हेरोइन तैयार की जा सकती थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 16 करोड़ रुपये है।

पुलिस पूछताछ में इस सिंडिकेट के काम करने के अनोखे और शातिर तरीके का भी पर्दाफाश हुआ है। तस्करों ने ड्रग्स की हेराफेरी के लिए ‘गोल्डन रूट’ चुना हुआ था। ये लोग म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा से कच्चे माल की खेप मणिपुर मंगाते थे। चेकिंग से बचने के लिए सिंडिकेट के मुख्य गुर्गे दिल्ली या यूपी से इंफाल के लिए फ्लाइट से जाते थे, ताकि रास्ते में किसी को शक न हो। वहां से डिलीवरी लेने के बाद, वे सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस चेकिंग को चकमा देने के लिए बसों और ट्रेनों के जरिए किस्तों में सफर तय कर उत्तर प्रदेश और दिल्ली पहुंचते थे। रोहिणी जिला पुलिस अब हापुर की उस फैक्ट्री और इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को पूरी तरह नेस्तनाबूद किया जा सके।

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