व्हाट्सएप पर निवेश का लालच देकर की 1.60 लाख की ठगी, चंडीगढ़ से दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली की साइबर ईस्ट थाना पुलिस ने व्हाट्सएप के जरिए निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान गुरिंदर शर्मा (25) और प्रदीप कुमार दूबे (31) के रूप में हुई है। ये दोनों आरोपी चंडीगढ़ के निवासी हैं। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन और बैंक से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर में लगभग 68 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़ा हुआ है।

पूर्वी जिले के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि मंडावली निवासी सुमित कुमार ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता को “इशिता प्रज्ञा” नाम की एक महिला ने व्हाट्सएप पर संपर्क किया और खुद को ‘एलारा कैपिटल इन्वेस्टमेंट कंपनी’ की प्रतिनिधि बताया। उसे शेयर बाजार में निवेश के नाम पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया, जिसके झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में कुल 1,60,080 रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद साइबर ईस्ट थाने में बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशंस पवन कुमार के पर्यवेक्षण और एसएचओ साइबर ईस्ट इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम में डब्लूएसआई रिंकी, हेड कांस्टेबल कुलदीप और पारस शामिल थे। पुलिस ने जब पैसों के लेन-देन की जांच की, तो पता चला कि ठगी की एक बड़ी राशि चंडीगढ़ के एक बैंक खाते में गई है और वहां से एटीएम के जरिए निकाली गई है। तकनीकी निगरानी और सीडीआर विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की और चंडीगढ़ में छापेमारी कर दोनों को धर दबोचा।

पूछताछ में आरोपियों के काम करने के तरीके का खुलासा हुआ। आरोपी गुरिंदर शर्मा ‘म्युल अकाउंट’ उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल विदेशी हैंडलर्स द्वारा ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था। दूसरा आरोपी प्रदीप कुमार दूबे, जो एक पेट्रोल पंप पर काम करता था, ठगी के पैसों को पेट्रोल पंप के मर्चेंट अकाउंट के जरिए रूट करता था और कमीशन काटकर उसे नकद में बदल देता था। इससे पुलिस के लिए ठगी के पैसों का सुराग लगाना मुश्किल हो जाता था।

डीसीपी ने बताया कि आरोपियों के बैंक खातों की जांच से पता चला है कि इनका संबंध हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के कई मामलों से है। अब तक लगभग 68 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और विदेशी संपर्कों का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है। इस गिरफ्तारी से साइबर ठगों के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद मिली है।

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