परिवार से मिलने आया था बदमाश, द्वारका एंटी-बर्गरी सेल ने दबोचा

नई दिल्ली: दिल्ली के द्वारका जिला पुलिस की एंटी-बर्गरी सेल ने दिल्ली के सबसे सक्रिय और कुख्यात अपराधियों में से एक, सुनील उर्फ सन्नू (38) को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। सुनील, जो डाबरी थाने का एक सूचीबद्ध ‘बैड कैरेक्टर’ है, पिछले एक साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर राजस्थान के अलवर में छिपकर रह रहा था। वह लूट और झपटमारी के 40 से अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है और दो मामलों में उसे ‘घोषित अपराधी’ भी घोषित किया गया था।

द्वारका जिले के डीसीपी कुशल पाल सिंह ने मामले का विवरण देते हुए बताया कि सुनील एक पेशेवर अपराधी है, जो 20 साल की उम्र से ही अपराध की दुनिया में सक्रिय है। उसके खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में लूट और झपटमारी के 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। अपने आपराधिक गतिविधियों के कारण वह अपने परिवार से भी अलग हो चुका था। लंबे समय तक पुलिस से बचने के लिए वह राजस्थान भाग गया था, जहां वह मजदूरी का काम कर रहा था।

पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि सुनील अपने परिवार से मिलने के लिए डाबरी के महावीर एन्क्लेव इलाके में आने वाला है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए एंटी-बर्गरी सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर विवेक मेनडोला के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। टीम में एसआई विनोद, हेड कांस्टेबल अनिल, कांस्टेबल आशीष और हेड कांस्टेबल रितेश शामिल थे। यह पूरी कार्रवाई एसीपी (ऑपरेशंस) सुभाष मलिक के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।

18 अप्रैल की शाम करीब 7:35 बजे, जैसे ही सुनील पैदल महावीर एन्क्लेव के पास पहुंचा, टीम ने उसे घेर लिया। सुनील ने भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क पुलिस टीम ने उसे धर दबोचा। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह राजस्थान में मजदूरी कर रहा था और दो साल बाद चुपके से अपने परिजनों से मिलने दिल्ली आया था।

सुनील पर दिल्ली कैंट, पंजाबी बाग और मंगोलपुरी थानों में दर्ज कई मामलों में एनबीडब्ल्यू जारी थे। वह चार गंभीर मामलों में वांछित था। डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बताया कि उसकी गिरफ्तारी से दिल्ली के कई पुराने आपराधिक मामलों का रास्ता साफ हो गया है। आरोपी को अदालत में पेश कर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। इस गिरफ्तारी से द्वारका जिले के पुलिस तंत्र की कार्यकुशलता और अपराधियों के प्रति उनकी जीरो टॉलरेंस नीति एक बार फिर उजागर हुई है।

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