पप्पू यादव पागल हो गए हैं, उनकी पत्नी भी नेता हैं… पूर्णिया सांसद के बयान पर अनंत सिंह का पलटवार

राष्ट्रीय जजमेंट

स्वतंत्र सांसद पप्पू यादव ने उस टिप्पणी के बाद बवाल खड़ा कर दिया है कि अधिकांश महिलाएं किसी पुरुष राजनेता के कमरे में कुछ समय बिताए बिना राजनीति में नहीं आ सकतीं। अब इसको लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है। पप्पू यादव का बयान, जेडीयू विधायक अनंत कुमार सिंह ने भी पलटवार किया है। अनंत सिंह ने कहा कि पप्पू यादव पागल हो गए हैं। उनकी अपनी पत्नी कहाँ हैं? उनकी अपनी पत्नी भी एक नेता हैं, उन्हें किसी और के बारे में बोलने से पहले उनसे भी पूछना चाहिए। आपको बता दें कि पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राजनीति में महिलाओं पर विवादास्पद टिप्पणी करके राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि महिलाएं समझौता किए बिना राजनीति में सफल नहीं हो सकतीं और आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा और संरक्षा की अनदेखी की जा रही है। पप्पू यादव ने कहा कि भारत में महिलाओं को देवी कहा जाता है, लेकिन यहां उन्हें कभी सम्मान नहीं मिलेगा। इसके लिए व्यवस्था और समाज दोनों जिम्मेदार हैं। 90% महिलाएं राजनेताओं के कमरे में प्रवेश किए बिना राजनीति नहीं कर सकतीं। पप्पू यादव ने कहा कि अगर लोकसभा में महिलाओं की गरिमा का मुद्दा उठाया जाता है, तो यह मजाक बन जाता है। उन्होंने आगे कहा कि घरेलू हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है? अमेरिका से लेकर भारत तक, कौन महिलाओं को बुरी नजरों से देख रहा है? राजनेता। किसी राजनेता के शयनकक्ष तक पहुँचे बिना 90% महिलाएं राजनीति में प्रवेश भी नहीं कर सकतीं। महिलाओं के शोषण की संस्कृति जड़ पकड़ चुकी है। भाजपा ने पप्पू यादव से माफी मांगने की मांग करते हुए उनके बयान को चौंकाने वाला बताया है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि चौंकाने वाला बयान! जब पूरा देश नारी शक्ति आंदोलन चला रहा था, तब देखिए कांग्रेस समर्थित सांसद क्या कह रहे हैं। सांसद पप्पू यादव का महिलाओं पर विवादित बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि 90% महिलाएं किसी नेता के कमरे में जाए बिना राजनीति नहीं कर सकतीं। यही उनकी मानसिकता है।इस टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने नेता से स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने एक बयान में कहा कि इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य महिला आयोग आपसे स्पष्टीकरण चाहता है कि आपने ऐसा आपत्तिजनक बयान क्यों दिया। आयोग यह भी पूछता है कि आपकी सदस्यता रद्द करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को सिफारिश क्यों नहीं की जानी चाहिए।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More