टीसीएस धर्मांतरण केस: फरार निदा खान पर पुलिस का बड़ा खुलासा, धर्म बदलने के लिए बनाती थी दबाव

राष्ट्रीय जजमेंट

(महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नासिक कार्यालय में कई महिला कर्मचारियों के कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण से जुड़े मामले में आरोपी निदा खान की भूमिका धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने से संबंधित है तथा उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। अधिकारी की यह टिप्पणी निदा के गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण हासिल करने में नाकाम रहने के एक दिन बाद आई है।टीसीएस में यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण से जुड़े कथित मामले के सिलसिले में अब तक नौ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से एक में निदा और चार अन्य लोगों को आरोपियों के रूप में नामजद किया गया है। इस मामले में अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम (पॉश) समिति में स्थानीय सदस्यों को शामिल किया जाना चाहिए और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बातचीत के बजाय नियमित रूप से व्यक्तिगत रूप से बैठकें करनी चाहिए।
अधिकारी ने कहा, “मामले में निदा की भूमिका कथित धर्मांतरण से संबंधित है।” निदा मामले के सामने आने के बाद से फरार है। सत्र अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है। टीसीएस के मुताबिक, निदा नासिक कार्यालय में एसोसिएट के रूप में कार्यरत थी। उसने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से तत्काल सुरक्षा का अनुरोध किया है।हालांकि, अधिकारी ने कहा कि निदा सत्र अदालत से गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा हासिल करने में नाकाम रही और उसे पकड़ने के लिए तलाश अभियान जारी है। अधिकारी ने बताया कि मामले की ज्यादातर पीड़िताएं मध्यमवर्गीय परिवारों से आती हैं और उनकी उम्र 21 से 30 साल के बीच है। उन्होंने बताया कि ये युवतियां एसोसिएट स्तर पर कार्यरत थीं और लगभग 20,000 रुपये प्रति माह वेतन पाती थीं।यह पूछे जाने पर कि क्या पीड़िताओं ने दफ्तर की पॉश समिति से संपर्क किया था, अधिकारी ने कहा कि कुछ “तकनीकी समस्या” थी और समिति के ज्यादातर सदस्य बाहरी थे। उन्होंने कहा कि मामले को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए पॉश समिति को सक्रिय होना चाहिए, उसमें स्थानीय सदस्यों की नियुक्ति की जानी चाहिए और सदस्यों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चर्चा के बजाय कम से कम हर तीन हफ्ते में एक बार आमने-सामने की बैठक करनी चाहिए। अधिकारी ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि कोई नयी पीड़िता सामने नहीं आई है, लेकिन अगर और शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं, तो पुलिस कार्रवाई करेगी।
निदा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, मुख्य आरोपी दानिश शेख ने टीसीएस में काम करते समय पीड़िता को अपने दोस्तों-तौसीफ और निदा से मिलवाया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि तीनों ने हिंदू अनुष्ठानों और देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया, खास तौर पर शिवलिंग, भगवान कृष्ण और (महाभारत की पात्र) द्रौपदी के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करके पीड़िता को धर्मांतरण के लिए उकसाने की कोशिश की।
अधिकारी के अनुसार, नासिक पुलिस ने निदा का पता लगाने के लिए तीन टीम गठित की हैं, जिनके सदस्यों को उसे पकड़ने के लिए विभिन्न जगहों पर भेजा गया है। नासिक पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले के सिलसिले में दर्ज नौ प्राथमिकियों में लगाए गए आरोपों की जांच कर रहा है। टीसीएस ने कहा कि कंपनी किसी भी तरह के उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति रखती है। उसने बताया कि नासिक कार्यालय में यौन उत्पीड़न में कथित रूप से शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। कंपनी ने दावा किया कि उसे इस मामले में आंतरिक चैनलों के माध्यम से कोई शिकायत हासिल नहीं हुई।

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