पवन खेड़ा कोसुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सीएम हिमंत बोले- अब असम में सरेंडर ही विकल्प

राष्ट्रीय जजमेंट

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को कानून के सामने आत्मसमर्पण कर गुवाहाटी में पेश होना चाहिए, क्योंकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े आरोपों वाले एक मामले में खेड़ा की पारगमन जमानत की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। 17 अप्रैल को उत्तर दिनाजपुर में एएनआई से बात करते हुए सरमा ने कहा कि मुझे लगता है कि पवन खेड़ा को कानून के सामने आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। उन्हें गुवाहाटी आकर आत्मसमर्पण करना चाहिए।

इसी दिन इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा मंगलवार तक दी गई उनकी पारगमन जमानत को बढ़ाने की मांग की गई थी। यह विस्तार इसलिए मांगा गया था ताकि खेड़ा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के मामले में असम की किसी संबंधित अदालत में अपील कर सकें।

असम पुलिस ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिसमें खेड़ा को 10 अप्रैल से एक सप्ताह की अग्रिम जमानत कुछ शर्तों के साथ दी गई थी। जमानत आदेश के अनुसार, खेड़ा को संबंधित कानूनी राहत पाने के लिए असम की सक्षम अदालत में जाना आवश्यक था। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने पासपोर्ट और संपत्ति संबंधी खुलासों के आरोपों से जुड़े मामले में रिनिकी भुयान सरमा द्वारा दायर मुकदमे में एक सप्ताह की अग्रिम जमानत मंजूर की थी।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More