रंजीत नगर में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, ‘रोडसाइड असिस्टेंस’ के नाम पर ठगी करने वाले 12 दबोचे

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के सेंट्रल जिला की एंटी नारकोटिक्स सेल ने गुरु अर्जुन नगर इलाके में चल रहे एक हाई-प्रोफाइल फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए ठगी के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान 12 आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनमें गिरोह के दो मुख्य मालिक सौरभ (28 वर्ष) और शाहनवाज (28 वर्ष) सहित 10 टेली-कॉलर शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से कंप्यूटर सिस्टम, भारी मात्रा में फर्जी प्लास्टिक पॉलिसी कार्ड, ग्राहकों का डेटा शीट और वारदात में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। यह गिरोह “RD सर्विसेज” के नाम से फर्जी रोडसाइड असिस्टेंस पॉलिसी बेचकर देश भर के वाहन स्वामियों को अपना शिकार बना रहा था।

सेंट्रल जिले के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि 4 अप्रैल को रंजीत नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुरु अर्जुन नगर में एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की सटीक गुप्त सूचना मिली थी। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एसीपी ऑपरेशंस पदम सिंह राणा की देखरेख और एंटी नारकोटिक्स सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर रोहित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम (एसआई मोनू चौहान, पंकज कुमार व अन्य) का गठन किया गया। डीसीपी ने बताया कि टीम ने रतन लाल कॉम्प्लेक्स स्थित ठिकाने पर छापेमारी की, जहाँ बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा था। मौके से सभी 12 आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया।

जांच और पूछताछ के दौरान गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए डीसीपी ने बताया कि ये लोग ग्राहकों को फोन करके दावा करते थे कि उनकी पॉलिसी लेने पर पूरे भारत में कहीं भी गाड़ी खराब होने, टायर पंक्चर होने या ब्रेकडाउन की स्थिति में तत्काल सहायता दी जाएगी। विश्वास जीतने के लिए ये लोग कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा देते थे और ग्राहकों के घर पर प्लास्टिक का एक आकर्षक पॉलिसी कार्ड भेजते थे, जिसके बदले 3000 से 4000 रुपये वसूले जाते थे। हालांकि, कार्ड मिलने और भुगतान होने के बाद ग्राहकों को कोई सेवा नहीं दी जाती थी और उनके नंबरों को ब्लैकलिस्ट या नजरअंदाज कर दिया जाता था।

डीसीपी ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा पिछले 6 महीनों से बिना किसी वैध लाइसेंस या पंजीकरण के चलाया जा रहा था। गिरोह ने आधिकारिक हेल्पलाइन के तौर पर एक कीपैड मोबाइल फोन रखा था, जिस पर आने वाली शिकायतों को वे जानबूझकर अनसुना कर देते थे। पकड़े गए सभी आरोपियों को स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है, जहाँ उनके खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन्होंने अब तक कितने लोगों से कुल कितनी राशि की ठगी की है और इनके पास ग्राहकों का डेटा कहाँ से आता था।

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