पाइल्स ऑपरेशन के बाद जब नहीं मिली छुट्टी तो दफ्तर में घुसकर लोको पायलट राजेश मीणा ने उतार दी पैंट, खूब मचा बवाल

राष्ट्रीय जजमेंट

लखनऊ रेल मंडल के एक लोको पायलट राजेश मीणा ने अपनी मेडिकल लीव रिजेक्ट होने पर कुछ ऐसा किया कि अब पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है.लोको पायलट राजेश मीणा पाइल्स की सर्जरी के बाद छुट्टी का अप्रूवल लेने सीनियर अधिकारियों के पास पहुंचे थे.लेकिन बार-बार मेडिकल रिपोर्ट और दवाइयों का पर्चा दिखाने के बाद भी जब उनकी मेडिकल लीव रिजेक्ट की गई तो वह अपना आपा खो बैठै.इस दौरान लोको पायलट ने गुस्से में अधिकारियों के सामने ही पैंट उतार दी.
अब इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

क्या है पूरी कहानी?

लोको पायलट राजेश मीणा की हाल ही में पाइल्स की सर्जरी हुई थी. डॉक्टरों ने उन्हें अभी और आराम करने की सलाह दी थी क्योंकि ऑपरेशन का घाव पूरी तरह नहीं भरा था. राजेश अपनी मेडिकल रिपोर्ट और दवाइयों के पर्चे लेकर चीफ क्रू कंट्रोलर ऑफिस पहुंचे थे. उन्होंने गुहार लगाई कि इस हालत में ट्रेन चलाना उनके लिए संभव नहीं है. लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और छुट्टी बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया.

अधिकारियों के रवैये और बार-बार अपनी बीमारी का सबूत देने की मजबूरी ने राजेश को इस कदर तनाव में डाल दिया कि उन्होंने गुस्से में आपा खो दिया. उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ‘अगर आपको घाव ही देखना है तो चलिए देख लीजिए.’ इस दौरान उन्होंने विरोध दिखाते हुए अपनी पैंट उतार दी. दफ्तर में मौजूद किसी शख्स ने इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया जो अब वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देखकर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. वहीं कुछ लोग रेलवे अधिकारियों के इस रवैये पर तीखे सवाल कर रहे हैं.

रेलवे यूनियन ने जताई नाराजगी

इस वीडियो के सामने आने के बाद रेलवे विभाग में खलबली मच गई है.रेलवे यूनियनों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि एक बीमार कर्मचारी को अपनी बीमारी साबित करने के लिए इस स्तर तक मजबूर करना बेहद शर्मनाक है. यूनियन ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है.इस घटना के बाद रेलवे विभाग ने फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया और कर्मचारियों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बन गया है. प्रशासन से उचित कार्रवाई और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की उम्मीद की जा रही है.

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