योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत की महत्वपूर्ण बैठकरू चुनावी रणनीतियों पर चर्चा

राष्ट्रीय जजमेंट

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। यह बैठक निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई और लगभग 40 मिनट तक चली
इस मुलाकात का एजेंडा गुप्त रखा गया है, लेकिन विधानसभा चुनावों के नजदीक होने के कारण यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले, भागवत मथुरा और गोरखपुर में आरएसएस के शताब्दी समारोह के तहत कार्यक्रमों में शामिल हुए थे।

बैठक में चर्चा के मुद्दे

लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने हिंदू जनसंख्या में गिरावट, धर्मांतरण और हिंदू एकता के महत्व पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ और भागवत के बीच बातचीत का मुख्य फोकस समाजवादी पार्टी के पीडीए (च्क्।) फॉर्मूलेशन और यूजीसी विनियम, 2026 के विवादों पर रहा। मुख्यमंत्री ने आरएसएस प्रमुख को इन विनियमों के संभावित प्रभावों के बारे में अपनी चिंताओं से अवगत कराया।

राजनीतिक स्थिति और चुनावी रणनीतियाँ

हाल ही में, सर्वाेच्च न्यायालय ने यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए नए नियमों पर रोक लगा दी थी। इस बैठक में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और आगामी 2027 विधानसभा चुनावों पर विस्तार से चर्चा की गई। चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे को प्रभावी बनाने पर भी विचार विमर्श हुआ।

भाजपा के लिए महत्वपूर्ण समय

उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर 2024 के आम चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट के बाद। अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिससे इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

हिंदू एकता पर जोर

भागवत द्वारा हिंदू एकता पर लगातार जोर देने के कारण इस बैठक को विशेष महत्व दिया जा रहा है। यह मुख्यमंत्री के हालिया भाषणों के सुर से मेल खाता है, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के श्पीडीए अभियानश् का उल्लेख किया था। भागवत जनवरी में मथुरा के 10 दिन के दौरे पर गए थे और अब वह उत्तर प्रदेश में अपने कार्यक्रमों के सिलसिले में लखनऊ पहुंचे हैं।

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