फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में महापौर का कड़ा रुख, ‘अवैध घुसपैठियों’ और भ्रष्ट अफसरों पर गिरेगी गाज

राष्ट्रीय जजमेंट

तावड़े ने नगर निकाय की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि बीएमसी अधिकारियों की ओर से जारी किए गए कुल 237 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए हैं, हालांकि मूल दस्तावेज अभी भी लाभार्थियों के पास ही हैं और उन्हें बरामद किया जाना बाकी है।
तावड़े ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि ये दस्तावेज एक महीने के भीतर बरामद कर लिए जाएंगे, लेकिन उन्होंने जब्ती की प्रक्रिया को केवल 15 दिनों में पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा।तावड़े ने कहा, “जन्म प्रमाण पत्र अवैध रूप से जारी किए जाने के सिलसिले में अब तक आठ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं और आगे की कार्रवाई जारी है। स्वास्थ्य विभाग के दो चिकित्सा अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। जांच जारी रहेगी।”महापौर ने दावा किया कि भाजपा में उनके सहयोगी और पूर्व लोकसभा सदस्य किरीट सोमैया लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, वार्ड स्तर पर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संबंध में दस्तावेज और शिकायतें पेश करते रहे हैं, लेकिन पहले कोई कार्रवाई नहीं की गई।उन्होंने कहा, “अब बीएमसी में भाजपा के सत्ता में आने के बाद प्रशासन ऐसे गंभीर मामलों को नजरअंदाज नहीं करेगा।” इस बीच, शिवसेना (उबाठा) नेता उद्धव ठाकरे ने तावड़े पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उनका पूरा ध्यान शहर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के इर्द-गिर्द घूमता है, न कि नागरिक से जुड़े मुद्दों पर।उन्होंने कहा कि भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों से निपटना केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह विभाग का काम है। ठाकरे ने केंद्र और राज्य दोनों पर बांग्लादेशियों की बड़ी संख्या में घुसपैठ को लेकर अपनी “विफलता” को छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे केवल यह साबित होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है।

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