क्राइम ब्रांच ने किया नकली NCERT किताबों के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़, ₹2 करोड़ का सामान बरामद, 3 गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ARSC यूनिट) ने शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को खोखला करने वाले एक बड़े संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने देशव्यापी स्तर पर चल रहे नकली NCERT किताबों के अवैध कारोबार पर कड़ा प्रहार करते हुए 44,862 पायरेटेड किताबें बरामद की हैं। इस कार्रवाई में दो बड़ी ऑफसेट प्रिंटिंग मशीनें, एल्युमीनियम प्लेट्स और भारी मात्रा में कागज के रील जब्त किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि एसीपी संजय कुमार नागपाल की देखरेख और इंस्पेक्टर के.के. शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम को सूचना मिली थी कि दरियागंज के एक गोदाम में भारी मात्रा में नकली NCERT किताबें जमा की गई हैं। पुलिस ने NCERT के अधिकारियों के साथ मिलकर वहां छापेमारी की, जहां से शुरुआती जांच में 12,755 किताबें मिलीं। इसके बाद मामला दर्ज कर जब तफ्तीश आगे बढ़ाई गई, तो इसके तार गाजियाबाद के लोनी इलाके से जुड़े मिले।

16 जनवरी को पुलिस ने लोनी के जावली गांव स्थित एक अवैध प्रिंटिंग फैक्ट्री पर छापा मारा। वहां से मुख्य आरोपी सुमित (35) को गिरफ्तार किया गया। फैक्ट्री के अंदर का नजारा देखकर पुलिस भी हैरान रह गई; वहां बड़े पैमाने पर NCERT की नकली किताबें छापी जा रही थीं। छापेमारी के दौरान वहां से 32,107 तैयार किताबें और प्रिंटिंग का पूरा सेटअप बरामद हुआ। सुमित यह किताबें पहले से गिरफ्तार आरोपी कनिष्क और विनोद जैन को सप्लाई करता था।

पकड़े गए आरोपियों में 65 वर्षीय विनोद जैन पहले भी साल 2023 में इसी तरह के अपराध में शामिल रहा है। कनिष्क (32) दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक है, जबकि सुमित इस पूरे अवैध कारखाने का संचालन कर रहा था। ये आरोपी कम लागत में घटिया कागज पर किताबें छापकर उन्हें बाजार में ऊंचे दामों पर बेचते थे, जिससे न केवल सरकार को राजस्व का घाटा हो रहा था, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के साथ भी धोखाधड़ी की जा रही थी। पुलिस अब इस सिंडिकेट की पूरी सप्लाई चेन और अन्य राज्यों में फैले इनके नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि इस अवैध धंधे को पूरी तरह जड़ से खत्म किया जा सके।

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